सरकार द्वारा राष्ट्रीय बिजली डेटा साझा करने का नया ढांचा पेश किया जाएगा
राष्ट्रीय बिजली डेटा साझा करने का ढांचा
इस महीने, सरकार एक नया ढांचा पेश करने जा रही है जो राष्ट्रीय बिजली डेटा साझा करने के लिए होगा। इस ढांचे के अंतर्गत बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण, ग्रिड संचालन और बिजली बाजारों से संबंधित एकीकृत डेटा उपलब्ध कराया जाएगा। बिजली सचिव पंकज अग्रवाल ने बताया कि यह पहल बिजली क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों, विशेषकर स्टार्टअप कंपनियों को बेहतर निर्णय लेने और योजनाएं बनाने में सहायता प्रदान करेगी।
कृत्रिम मेधा का उपयोग
यह ढांचा इसी महीने पेश किया जाएगा। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) और उद्योग मंडल द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में, अग्रवाल ने बिजली क्षेत्र की कंपनियों से कृत्रिम मेधा (एआई) को अपनाने और नए अनुप्रयोग विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि डेटा की उपलब्धता के बिना उपकरण और अनुप्रयोग विकसित करना संभव नहीं है, लेकिन सभी प्रकार के डेटा को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
डेटा साझा करने की प्रक्रिया
अग्रवाल ने कहा, "जब हम स्टार्टअप के बारे में बात करते हैं और वे डेटा की मांग करते हैं, तो हमें यह विचार करना पड़ता है कि कौन-सा डेटा साझा किया जा सकता है।" उन्होंने बताया कि हितधारकों के साथ विचार-विमर्श के बाद राष्ट्रीय बिजली डेटा साझा करने का ढांचा तैयार किया गया है। यह ढांचा अक्टूबर में लागू होगा और इसमें राष्ट्रीय बिजली डेटा संचालन समिति का गठन किया जाएगा।
साइबर सुरक्षा और एआई
इस समिति की अध्यक्षता सीईए के चेयरमैन करेंगे, जिसमें सरकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल होंगे। अग्रवाल ने कहा कि इसका उद्देश्य बिजली कंपनियों को व्यवस्थित तरीके से डेटा साझा करने का एक प्रारंभिक आधार प्रदान करना है, ताकि स्टार्टअप इसका उपयोग कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि डेटा को एक समान प्रारूप में होना चाहिए, जिससे स्टार्टअप इसका प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। एआई आधारित प्रणालियों की सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा और एआई की तैनाती एक साथ चलेंगी।
स्थानीय विकास के लाभ
अग्रवाल ने यह भी बताया कि यदि एआई मॉडल, विशेषकर उनके अनुप्रयोग, देश में विकसित किए जाते हैं, तो "स्वाभाविक रूप से कोड पर हमारा नियंत्रण रहेगा।"