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सरकार ने LTCG टैक्स को हटाने की संभावनाओं को किया खारिज

केंद्र सरकार ने शेयर बाजार के निवेशकों को बड़ा झटका देते हुए लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को हटाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री ने संसद में स्पष्ट किया कि इस टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। इसके पीछे का मुख्य कारण टैक्स से होने वाली बढ़ती आय है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 78% बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। निवेशकों की चिंताएं और बाजार में विश्वास को बढ़ाने की मांग के बावजूद, सरकार ने इस टैक्स को समाप्त करने की योजना से इनकार किया है।
 

LTCG टैक्स पर सरकार का स्पष्ट रुख

केंद्र सरकार ने सोमवार को शेयर बाजार के निवेशकों और विशेषज्ञों को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए लिस्टेड इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को समाप्त करने की संभावनाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया। संसद में यह स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में रिटेल और घरेलू निवेशकों के लिए इस टैक्स को खत्म करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.


वित्त राज्य मंत्री का बयान

लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार के पास LTCG टैक्स को हटाने की कोई योजना नहीं है। हालांकि, कुछ बाजार वर्गों और निवेशक संगठनों द्वारा इसे हटाने की मांग की जा रही थी। उन्होंने बताया कि टैक्स नीतियों और कैपिटल गेन्स टैक्स की दरों की समय-समय पर समीक्षा की जाती है, जो सालाना बजट प्रक्रिया के तहत व्यापक आर्थिक स्थितियों को ध्यान में रखकर तय होती है.


टैक्स कलेक्शन में वृद्धि

सरकार द्वारा इस टैक्स को न हटाने का मुख्य कारण इसकी बढ़ती आय है। संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी ट्रांजैक्शन पर LTCG टैक्स से होने वाला कलेक्शन पिछले साल के 72,249 करोड़ रुपये से लगभग 78% बढ़कर असेसमेंट ईयर 2025-26 में 1,29,158 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इस टैक्स के बढ़ते योगदान को देखते हुए सरकार इसे समाप्त करने के मूड में नहीं है.


निवेशकों की चिंताएं

यह स्पष्टीकरण निवेशकों और बाजार के भागीदारों द्वारा इस टैक्स को वापस लेने की लगातार उठ रही मांगों के बीच आया है। कुछ का मानना है कि यह टैक्स लॉन्ग-टर्म निवेश को हतोत्साहित करता है और रिटर्न को कम करता है। वहीं, कुछ अन्य लोग घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच समानता की मांग कर रहे हैं, खासकर जब सरकार ने हाल ही में सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए टैक्स छूट की घोषणा की.


LTCG टैक्स की वर्तमान स्थिति

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स तब उत्पन्न होता है जब लिस्टेड शेयरों या इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड को एक साल से अधिक समय तक रखा जाता है। मौजूदा टैक्स व्यवस्था के तहत, एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के गेन्स पर 12.5% की दर से टैक्स लगता है, जबकि इस सीमा तक के गेन्स टैक्स-फ्री रहते हैं.


निवेशकों की उम्मीदें

पिछले एक साल में यह मुद्दा कई बार उठ चुका है, क्योंकि इक्विटी मार्केट रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं और रिटेल निवेशकों की भागीदारी में भारी बढ़ोतरी हुई है। कई निवेशकों और विशेषज्ञों का मानना है कि LTCG टैक्स की दर कम करने या छूट की सीमा बढ़ाने से लंबे समय के लिए निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है.


सरकार का रुख

हालांकि, सरकार के रुख के कारण ये उम्मीदें बार-बार कमजोर पड़ी हैं। पहले भी संसद में इस टैक्स को खत्म करने के बारे में सवाल उठाए गए हैं, और वित्त मंत्रालय ने हमेशा यही कहा है कि इस टैक्स को हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सोमवार को दी गई सफाई इसी बात को और पुख्ता करती है.