सरकार ने इलेक्ट्रिक बस और ट्रक निर्माताओं को दी बड़ी राहत
सरकार की नई पहल
सरकार ने 10,900 करोड़ रुपये की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम में स्थानीयकरण से संबंधित नियमों में ढील दी है, जिससे इलेक्ट्रिक बस और ट्रक निर्माताओं को महत्वपूर्ण राहत मिली है। इस योजना के अंतर्गत, उन्हें 31 अगस्त तक दुर्लभ खनिजों से बनी 'ट्रैक्शन मोटर' का आयात करने की अनुमति दी गई है।
आयात की समयसीमा बढ़ाई गई
भारी उद्योग मंत्रालय ने 13 मार्च को जारी अधिसूचनाओं में ई-ट्रक (एन2/एन3) और ई-बस (एम2/एम3) के लिए 'ट्रैक्शन मोटर' के आयात पर रोक लगाने की समयसीमा को बढ़ा दिया है। इस निर्णय से निर्माताओं को कलपुर्जों की कमी से राहत मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय विनिर्माण की समयसीमा
ई-बस और ई-ट्रक के लिए 'ट्रैक्शन मोटर' के स्थानीय विनिर्माण की समयसीमा को दूसरी बार बढ़ाया गया है। पहले, पिछले वर्ष सितंबर में केंद्र सरकार ने इसे मार्च 2026 तक टालने का निर्णय लिया था।
नई विनिर्माण आवश्यकताएँ
चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के तहत 'पीएम इलेक्ट्रिक ड्राइव रिवोल्यूशन इन इनोवेटिव व्हीकल एन्हांसमेंट' (पीएम ई-ड्राइव) योजना में यह प्रावधान है कि 'ट्रैक्शन मोटर' के निर्माण में आवश्यक कार्य जैसे चुंबक फिटिंग, रोटर असेंबली, स्टेटर असेंबली, शाफ्ट फिटिंग, बेयरिंग फिटिंग, एनक्लोजर फिटिंग, कनेक्टर फिटिंग और केबल फिटिंग देश में ही किए जाएं।
आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयास
यह प्रावधान 1 सितंबर, 2026 से लागू होगा। सरकार इलेक्ट्रिक वाहन, इलेक्ट्रॉनिक, वैमानिकी और हरित ऊर्जा क्षेत्रों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने के लिए दुर्लभ खनिजों के आयात पर चीन की निर्भरता को कम करने के उपाय कर रही है। हालांकि, स्थिर आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है।
नए प्रोत्साहन योजनाएँ
केंद्र सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये की लागत से 'सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट' (आरईपीएम) विनिर्माण प्रोत्साहन योजना को भी अधिसूचित किया है।