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सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग का प्रस्ताव: वेतन में भारी वृद्धि की मांग

सरकारी कर्मचारी संघों ने 8वें वेतन आयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें न्यूनतम मूल वेतन को 69,000 रुपये तक बढ़ाने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव में 6 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, और भत्तों में वृद्धि जैसे कई महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। हालांकि, इन सिफारिशों का अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाएगा। जानें इस प्रस्ताव के अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं के बारे में।
 

8वें वेतन आयोग के तहत प्रस्तावित बदलाव

सरकारी कर्मचारी संघों ने 8वें वेतन आयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना प्रस्तुत की है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह वास्तविकता में कैसे लागू होगी। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य न्यूनतम मूल वेतन को 69,000 रुपये तक बढ़ाना है, जो वर्तमान में 18,000 रुपये है।


नेशनल काउंसिल–ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी के कर्मचारी प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव ने इसकी मांग के बड़े पैमाने के कारण तुरंत ध्यान आकर्षित किया है.


NC-JCM की सिफारिशें

नेशनल काउंसिल (ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी), जिसे NC-JCM के नाम से जाना जाता है, ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। 51 पन्नों के इस ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है, जिसमें न्यूनतम मूल वेतन को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग शामिल है।


समिति ने 3.83 के फ़िटमेंट फ़ैक्टर का भी प्रस्ताव दिया है, जिससे मौजूदा वेतन और पेंशन में काफी वृद्धि होगी। इसके अलावा, नए वेतनमान को 1 जनवरी, 2026 से लागू करने की मांग की गई है.


6% वार्षिक वेतन वृद्धि का प्रस्ताव

कर्मचारियों की आय को महंगाई के अनुसार बनाए रखने के लिए, 6 प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि की मांग की गई है। वर्तमान में, यह दर इससे कम है। ड्राफ्ट में मौजूदा वेतन मैट्रिक्स को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें 7वें वेतन आयोग के 18 स्तरों को घटाकर 7 स्तर करने का प्रस्ताव है.


पेंशन और पदोन्नति पर जोर

महत्वपूर्ण मांगों में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को फिर से लागू करना शामिल है, विशेषकर उन कर्मचारियों के लिए जो 2004 के बाद नियुक्त हुए हैं। समिति ने पेंशन को अंतिम वेतन के 67 प्रतिशत तक बढ़ाने, पारिवारिक पेंशन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने, और 30 साल की सेवा में कम से कम पांच पदोन्नति सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव दिया है.


भत्तों और सुविधाओं में वृद्धि

इस ड्राफ्ट में HRA (हाउस रेंट अलाउंस) बढ़ाने का सुझाव दिया गया है, जो मेट्रो शहरों में 30 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकता है। इसके साथ ही बेहतर इंश्योरेंस कवर, ड्यूटी के दौरान मृत्यु पर अधिक मुआवजा, लीव एनकैशमेंट पर रोक हटाना, मातृत्व अवकाश को 240 दिन करना, और पितृत्व अवकाश व पेरेंटल केयर लीव बढ़ाने की सिफारिशें भी शामिल हैं.


अंतिम निर्णय सरकार का

ये सभी सिफारिशें अभी प्रस्तावित हैं और अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिया जाएगा। हालांकि, नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मैकेनिज़्म की सिफारिशों को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह लाखों कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करती है.