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सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों का लाभ बढ़ा, लेकिन बिक्री में नुकसान जारी

देश की तीन प्रमुख सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने हाल ही में अपनी वित्तीय स्थिति में सुधार दिखाया है, लेकिन पेट्रोल और डीजल की बिक्री में हो रहे नुकसान और एलपीजी सब्सिडी की बढ़ती बकाया राशि ने उन्हें चिंतित कर दिया है। इंडियन ऑयल ने सबसे अधिक लाभ दर्ज किया, जबकि बीपीसीएल और एचपीसीएल के मुनाफे में कमी आई है। कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर नजर डालते हुए, यह स्पष्ट है कि सरकारी सब्सिडी की कमी और स्थिर कीमतों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है।
 

पेट्रोलियम कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन

नई दिल्ली, 1 नवंबर: देश की तीन प्रमुख सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों - इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में 30,106 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 68.3 प्रतिशत अधिक है। कंपनियों के इस सकारात्मक प्रदर्शन में मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन और कच्चे तेल की कीमतों में कमी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


बिक्री पर नुकसान की चिंता

हालांकि, पेट्रोल और डीजल की बिक्री में हो रहे नुकसान और एलपीजी सब्सिडी की बढ़ती बकाया राशि ने कंपनियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। सितंबर तिमाही में तीनों कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में काफी अधिक रहा। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इन कंपनियों को लगभग 18,150 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।


इंडियन ऑयल का प्रमुख प्रदर्शन

दूसरी तिमाही में कंपनियों ने शानदार वापसी की है। विशेष रूप से, सितंबर तिमाही का मुनाफा वित्त वर्ष 2025-26 में तीनों कंपनियों के कुल 77,281 करोड़ रुपये के लाभ का लगभग 39 प्रतिशत है। इंडियन ऑयल ने इस तिमाही में 21,630 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे अधिक एकल शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7,610 करोड़ रुपये का लगभग तीन गुना है।


रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार

बीपीसीएल का एकल शुद्ध लाभ 22.5 प्रतिशत घटकर 4,993 करोड़ रुपये और एचपीसीएल का मुनाफा नौ प्रतिशत कम होकर 3,483 करोड़ रुपये रह गया। पिछले वर्ष की समान तिमाही में इन दोनों कंपनियों का मुनाफा काफी ऊंचा था। कंपनियों के मुनाफे में वृद्धि का मुख्य कारण रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार रहा। एचपीसीएल ने सितंबर तिमाही में प्रति बैरल कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में बदलने पर 32.15 डॉलर प्रति बैरल की कमाई की, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 8.80 डॉलर थी।


बिक्री पर नुकसान का असर

इसी तरह, बीपीसीएल का रिफाइनिंग मार्जिन 10.78 डॉलर से बढ़कर 32.53 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। आईओसी को उसके रिफाइनिंग कारोबार के साथ-साथ पेट्रोरसायन और गैस कारोबार से भी अच्छा योगदान मिला। इसके अलावा, जून से अगस्त के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अस्थायी गिरावट से कंपनी को लगभग 7,000 करोड़ रुपये का भंडारण लाभ हुआ।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता

हालांकि, कंपनियों की वित्तीय स्थिति का एक दूसरा पहलू भी है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई से स्थिर बनी हुई हैं, जबकि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम मार्च से नहीं बदले हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद खुदरा कीमतों में बदलाव नहीं होने से कंपनियों को बिक्री पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।


एलपीजी पर बढ़ता घाटा

उद्योग सूत्रों के अनुसार, पिछले महीने तक कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर चार से पांच रुपये और डीजल पर 18 से 20 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा था। एलपीजी के मोर्चे पर भी कंपनियों का घाटा लगातार बढ़ रहा है। आईओसी के वित्त निदेशक अनुज जैन ने निवेशकों के साथ बातचीत में कहा कि एलपीजी पर प्रति सिलेंडर नुकसान सितंबर में 184 रुपये था, जो अक्टूबर में बढ़कर 229 रुपये हो गया।


सरकारी सब्सिडी का प्रभाव

नवंबर में इसके 309 रुपये और दिसंबर में 370 रुपये प्रति सिलेंडर तक पहुंचने का अनुमान है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें बाजार के अनुरूप तय करने की व्यवस्था है, इसलिए इनकी बिक्री पर होने वाला नुकसान कंपनियों को खुद उठाना पड़ता है। वहीं, घरेलू एलपीजी की कीमतें नियंत्रित होने के कारण खुदरा बिक्री मूल्य और वास्तविक लागत के बीच के अंतर की भरपाई सरकार से अपेक्षित होती है।


बकाया राशि का बोझ

लेकिन सरकारी सब्सिडी समय पर नहीं मिलने से कंपनियों पर बकाया राशि का बोझ बढ़ रहा है। कंपनियों की ओर से दाखिल वित्तीय नतीजों के अनुसार, सितंबर के अंत तक तीनों पेट्रोलियम कंपनियों को लागत से कम मूल्य पर बिक्री से 67,900 करोड़ रुपये तक का नुकसान हुआ है। इसमें आईओसी का हिस्सा 32,505.69 करोड़ रुपये, बीपीसीएल का 17,334.40 करोड़ रुपये और एचपीसीएल का 18,048.82 करोड़ रुपये रहा।