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सुजलॉन समूह का ₹550 करोड़ का निवेश, तीन नए एआई आधारित पवन टर्बाइन कारखाने स्थापित करेगा

सुजलॉन समूह ने पवन ऊर्जा उपकरणों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ₹550 करोड़ के निवेश से तीन नए एआई आधारित पवन टर्बाइन कारखाने स्थापित करने की घोषणा की है। इन संयंत्रों का निर्माण गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु में किया जाएगा, जिससे रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। कंपनी का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाना और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना है। जानें इस महत्वपूर्ण निवेश के बारे में और अधिक जानकारी।
 

सुजलॉन समूह का नया निवेश

(अभिषेक सोनकर)


चेन्नई, 11 अक्टूबर: सुजलॉन समूह ने देश में पवन ऊर्जा उपकरणों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए ₹550 करोड़ के निवेश से तीन नए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित पवन टर्बाइन ब्लेड कारखाने स्थापित करने की योजना बनाई है। कंपनी के सह-संस्थापक गिरीश तांती ने इस बात की जानकारी दी।


तांती के अनुसार, इन तीन संयंत्रों में से दो गुजरात और कर्नाटक में और एक तमिलनाडु में स्थापित किया जाएगा। इन कारखानों का निर्माण 2027 तक पूरा करने की योजना है। कुल निवेश में से ₹200 करोड़ तमिलनाडु परियोजना पर और शेष ₹350 करोड़ गुजरात और कर्नाटक की इकाइयों पर खर्च किए जाएंगे। कंपनी इस परियोजना के लिए धन अपने आंतरिक स्रोतों से जुटाएगी।


इन नए संयंत्रों के शुरू होने के बाद सुजलॉन के विनिर्माण नेटवर्क में कुल 18 कारखाने हो जाएंगे। कंपनी का कहना है कि ये संयंत्र पवन ऊर्जा परियोजना स्थलों के निकट स्थापित किए जाएंगे, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक में सुधार होगा और उपकरणों की आपूर्ति में तेजी आएगी।


कंपनी इन संयंत्रों को ‘स्मार्ट फैक्ट्रियों’ के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है, जहां कृत्रिम मेधा (एआई), उन्नत विश्लेषण प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स और डिजिटल प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। एआई आधारित विजन प्रणाली के माध्यम से उत्पादों में खामियों की त्वरित पहचान की जाएगी। इसके अलावा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), मैन्युफैक्चरिंग एग्जिक्यूशन सिस्टम (एमईएस) और एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) जैसी तकनीकों को भी विनिर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।


तांती ने बताया कि कंपनी का लक्ष्य उत्पादन क्षमता को बढ़ाना, उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करना, कार्यस्थल की सुरक्षा को सुनिश्चित करना और परिचालन दक्षता को बढ़ाना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार देश में निर्मित कुशल पवन ऊर्जा उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है।


सुजलॉन के अनुसार, इन तीन नए कारखानों से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 12,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उत्पन्न होने की संभावना है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत रोजगार ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।


कंपनी के पास मार्च 2026 तक विभिन्न स्वच्छ ऊर्जा कंपनियों से लगभग छह गीगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा परियोजनाओं के ऑर्डर हैं। नए कारखानों के माध्यम से कंपनी इस मांग को समय पर पूरा करने और घरेलू विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।


वित्त वर्ष 2025-26 में सुजलॉन ने ₹16,679 करोड़ का राजस्व और ₹3,163 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया था, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी का राजस्व ₹10,851 करोड़ और शुद्ध लाभ ₹2,072 करोड़ रहा था।


कंपनी पहले से ही अपने ब्लेड विनिर्माण संयंत्रों में स्वचालन का उपयोग कर रही है।