सुभाष चंद्र की दिवाला प्रक्रिया में विवाद बढ़ा, वित्तीय संस्थान अपील की तैयारी में
सुभाष चंद्र की दिवाला प्रक्रिया में नया मोड़
सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के हालिया निर्णय के बाद विवाद अब अपीलीय स्तर पर पहुंचता नजर आ रहा है। भारतीय जीवन बीमा निगम आवास वित्त, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने 22,000 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये के पुनर्भुगतान प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। ये तीनों वित्तीय संस्थान अब इस निर्णय को चुनौती देने की योजना बना रहे हैं.
संयुक्त मत हिस्सेदारी और मतदान
भारतीय जीवन बीमा निगम आवास वित्त ने बताया कि दिवाला प्रक्रिया में उसकी, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की संयुक्त मत हिस्सेदारी 8.45 प्रतिशत है। इन तीनों संस्थानों ने सुभाष चंद्र की पुनर्भुगतान योजना के खिलाफ मतदान किया था। कंपनी का कहना है कि प्रस्ताव को अन्य वित्तीय लेनदारों से मिले 80.81 प्रतिशत मतों के आधार पर मंजूरी मिली.
अपील की प्रक्रिया
भारतीय जीवन बीमा निगम आवास वित्त ने यह स्पष्ट किया है कि वह अन्य सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर तुरंत राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर करेगा। संस्था का कहना है कि उसने प्रस्ताव का विरोध किया था और अब न्यायाधिकरण के आदेश की अपीलीय समीक्षा कराई जाएगी.
केनरा बैंक और यूनियन बैंक की स्थिति
केनरा बैंक ने भी कहा कि उसने 6.25 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना के खिलाफ मतदान किया था। बैंक के पास दिवाला प्रक्रिया में 1.60 प्रतिशत मत हिस्सेदारी थी, जबकि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की हिस्सेदारी 0.76 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम आवास वित्त की 6.09 प्रतिशत थी. इन तीनों की संयुक्त हिस्सेदारी 8.45 प्रतिशत है.
अन्य वित्तीय संस्थानों की आपत्ति
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भी कहा कि उसने अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं के साथ प्रस्ताव को खारिज किया था और राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के सामने भी इसके अनुमोदन का विरोध किया था। हालांकि, कुछ निजी लेनदारों के बहुमत मत के कारण प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई. बैंक ने भी तत्काल अपील करने की बात कही है.
एचडीएफसी बैंक की प्रतिक्रिया
इस मामले में एचडीएफसी बैंक ने भी आपत्ति जताई है। बैंक ने 27 अगस्त को कहा था कि उसने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन बहुमत के आधार पर योजना मंजूर हो गई। एचडीएफसी बैंक के अनुसार, न्यायाधिकरण के आदेश में उसके कुल दावे का केवल 3.2 प्रतिशत हिस्सा ही स्वीकार किया गया है.
महत्वपूर्ण निर्णय की प्रतीक्षा
इस मामले में बड़े दावों और कम पुनर्भुगतान राशि के बीच का अंतर इसे विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। अब अपीलीय न्यायाधिकरण में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि सुभाष चंद्र की पुनर्भुगतान योजना मौजूदा रूप में कायम रहती है या इसमें कोई बदलाव होता है.