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सुभाष चंद्र ने मुकेश अंबानी पर लगाया गलत जानकारी फैलाने का आरोप

जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्र ने मुकेश अंबानी और उनके मीडिया समूह पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के हालिया फैसले के बाद, चंद्र ने अपनी दिवाला प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ वास्तविक दावे 3,992 करोड़ रुपये के हैं, जबकि मीडिया में 22,000 करोड़ रुपये का जिक्र किया गया है। रिलायंस समूह ने इन आरोपों को निराधार बताया है। इस विवाद में कानूनी जांच और न्यायालय की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
 

सुभाष चंद्र का आरोप

जी समूह के संस्थापक सुभाष चंद्र ने हाल ही में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के निर्णय के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और उनके मीडिया समूह टीवी18 पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। इस बीच, रिलायंस समूह ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है।


दिवाला प्रक्रिया का विवरण

जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने सुभाष चंद्र की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया में एक पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को लगभग 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। यह राशि उनके खिलाफ स्वीकार किए गए लगभग 22,006.57 करोड़ रुपये के दावों की तुलना में बहुत कम है, जिससे यह मामला चर्चा में आया है।


सुभाष चंद्र का स्पष्टीकरण

सुभाष चंद्र ने कहा कि 22,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा उनकी व्यक्तिगत देनदारी के रूप में प्रस्तुत करना गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इन कर्जों के सीधे उधारकर्ता नहीं थे, बल्कि एस्सेल समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के व्यक्तिगत गारंटर थे।


वीडियो बयान में जानकारी

28 अगस्त को जारी एक वीडियो में चंद्र ने कहा कि व्यक्तिगत गारंटर के रूप में उनके खिलाफ वास्तविक दावे लगभग 3,992 करोड़ रुपये के थे। इनमें से 620 करोड़ रुपये का निपटारा पहले ही किया जा चुका है, और संबंधित कंपनियों ने 1,063 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की पेशकश की है। चंद्र के अनुसार, जिन कंपनियों के कर्ज की उन्होंने गारंटी दी थी, वे अब तक लगभग 43,000 करोड़ रुपये चुका चुकी हैं।


टीवी18 पर आरोप

चंद्र ने एक अन्य वीडियो में मुकेश अंबानी और रिलायंस से जुड़े मीडिया संस्थानों पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीवी18 और उसके समाचार माध्यमों ने उनकी दिवाला प्रक्रिया के बारे में ऐसी खबरें प्रकाशित कीं, जिससे यह धारणा बनी कि 22,000 करोड़ रुपये का कर्ज केवल 6.5 करोड़ रुपये में निपट गया।


रिलायंस का जवाब

रिलायंस समूह ने इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुभाष चंद्र की टिप्पणियां निराधार हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके मीडिया संस्थानों का उपयोग कभी किसी व्यक्ति पर हमला करने के लिए नहीं किया गया है और भविष्य में भी ऐसा नहीं होगा।


पुराने विवादों का जिक्र

चंद्र ने 2019 में जी के शेयर मूल्य में आई गिरावट को लेकर कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि सैकड़ों बेनामी कंपनियों के माध्यम से कथित तौर पर शेयर मूल्य को प्रभावित किया गया था। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।


कानूनी विवाद जारी

यह ध्यान देने योग्य है कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर कानूनी विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। केनरा बैंक ने इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील की है, जिससे 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना पर न्यायिक समीक्षा जारी रहने की संभावना है।


संपत्तियों का दावा

सुभाष चंद्र ने अपने समूह पर लगभग 45,000 करोड़ रुपये का कर्ज होने का दावा किया है और कहा है कि संपत्तियां बेचकर 43,000 से 45,000 करोड़ रुपये तक चुकाए जा चुके हैं। इस पूरे विवाद में न्यायाधिकरण की आगे की कार्रवाई और पक्षों के दावों पर होने वाली कानूनी जांच महत्वपूर्ण रहने वाली है।