सुभाष चंद्रा ने एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ अपील की
सुभाष चंद्रा की अपील का विवरण
एस्सेल समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा ने राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में एक अपील दायर की है। यह अपील एनसीएलटी की पांच-सदस्यीय पीठ के उस आदेश के खिलाफ है, जिसमें उन्हें अपनी संपत्तियों को हस्तांतरित करने से रोका गया था। एनसीएलटी ने एक सितंबर को चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला प्रक्रिया से संबंधित मामले में तीसरे निर्णायक सदस्य के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस तीसरे सदस्य ने चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी, जबकि उनकी कुल देनदारियां लगभग 22,000 करोड़ रुपये थीं।
एनसीएलएटी में सुनवाई
बुधवार को चंद्रा की अपील एनसीएलएटी की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत की गई। पीठ ने उनके वकील को निर्देश दिया कि वे अपील की प्रतियां कर्जदाताओं को दें और उन्हें मामले में पक्षकार बनाएं। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।
चंद्रा की याचिका पर सवाल
चंद्रा ने अपनी याचिका में एनसीएलटी के आदेश के दायरे पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि पीठ ने सभी लंबित आवेदनों पर नए सिरे से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और उन्हें किसी भी संपत्ति को हस्तांतरित करने से रोक दिया।
एनसीएलटी के आदेश पर आपत्ति
चंद्रा ने तर्क दिया कि एनसीएलटी का आदेश उसके सीमित अधिकार क्षेत्र से परे है। उन्होंने कहा कि इससे मतभेद के कुछ बिंदुओं पर निर्णय के लिए की गई संदर्भ प्रक्रिया पूरी कार्यवाही की नए सिरे से सुनवाई में बदल गई है।
पुनर्भुगतान योजना का विवरण
चंद्रा ने अपनी अपील में एनसीएलटी द्वारा पांच-सदस्यीय पीठ के गठन पर भी सवाल उठाया है। पहले, एनसीएलटी की दो-सदस्यीय पीठ ने चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया पर अलग-अलग फैसले दिए थे। न्यायिक सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ने चंद्रा की 6.5 करोड़ रुपये की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी थी।
आगे की कार्यवाही
हालांकि, तकनीकी सदस्य रीता कोहली ने इस प्रस्ताव पर असहमति जताते हुए इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद, न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया था। शर्मा ने प्रमुख मुद्दों पर भारद्वाज से सहमति जताते हुए चंद्रा की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी। इस योजना में व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ी लगभग 22,006 करोड़ रुपये की देनदारियों का निपटान 6.5 करोड़ रुपये में करने का प्रस्ताव था।