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सेबी का प्रयास: भारतीय पूंजी बाजार को मजबूत और सुरक्षित बनाना

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने पूंजी बाजार को अधिक कुशल और सुरक्षित बनाने के लिए नियामक के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, और पश्चिम बंगाल में निवेशकों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है। जानें कैसे सेबी व्यवसायों और निवेशकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है।
 

सेबी का दृष्टिकोण

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को बताया कि नियामक देश के पूंजी बाजारों को अधिक सुगम, कुशल और मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सेबी का मुख्य उद्देश्य पूंजी निर्माण को आसान बनाना, कारोबारी सुगमता में सुधार करना और निवेशकों की सुरक्षा को बढ़ाना है।


भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स इन्वेस्टर्स फोरम में पूंजी बाजार के विकास पर चर्चा करते हुए, पांडेय ने बताया कि पिछले दशक में बाजार पूंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसमें कंपनियां सालाना औसतन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक का धन इक्विटी और ऋण निर्गमों के माध्यम से जुटा रही हैं।


निवेशकों की सुरक्षा पर जोर

उन्होंने कहा कि हम व्यवसायों के लिए बाजारों को लगातार मजबूत कर रहे हैं, और निवेशकों की सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जा रही है। विश्वस्तरीय बाजारों को सामान्य समय में ही नहीं, बल्कि संकट के समय में भी लचीला होना चाहिए।


पांडेय ने यह भी बताया कि पूंजी बाजार में पश्चिम बंगाल की भागीदारी में काफी वृद्धि हुई है। यहां निवेशकों की संख्या वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग 12 लाख से बढ़कर अब 90 लाख से अधिक हो गई है, जिनमें से लगभग 36 प्रतिशत युवा निवेशक 30 वर्ष से कम आयु के हैं।