☰
×

सेबी की कार्रवाई: संदिग्ध कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने की योजना

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने उन कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने की योजना बनाई है जो किसी भी आर्थिक गतिविधि में शामिल नहीं हैं। सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि ऐसी कंपनियों की उपस्थिति निवेशकों के लिए खतरा बन सकती है। इसके अलावा, सेबी ने निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। जानें इस प्रक्रिया के पीछे के कारण और सेबी के अन्य प्रयासों के बारे में।
 

कोलकाता में सेबी की नई पहल

कोलकाता, एक नवंबर: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) उन सूचीबद्ध कंपनियों को शेयर बाजार से हटाने की प्रक्रिया में है, जो किसी भी प्रकार की आर्थिक गतिविधियों में संलग्न नहीं हैं। सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को बताया कि ऐसी कंपनियों की उपस्थिति निवेशकों के लिए संभावित खतरा बन सकती है। उन्होंने कहा कि कई कंपनियां ऐसी हैं जो वास्तव में कोई कारोबारी गतिविधि नहीं कर रही हैं।


कंपनियों की गतिविधियों पर चिंता

इन कंपनियों के शेयरों का उपयोग कुछ बाजार संचालक कीमतों में कृत्रिम वृद्धि लाने और बाद में उन्हें बेचकर लाभ कमाने के लिए करते हैं, जिसे 'पंप एंड डंप' गतिविधि कहा जाता है। इससे छोटे और खुदरा निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए, इन कंपनियों को बाजार से हटाना आवश्यक है।


बाजार की पारदर्शिता बनाए रखना

पांडेय ने कहा कि सेबी बाजार की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए प्रयासरत है। सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन समूहों के माध्यम से निवेशकों को ऐसे शेयरों में फंसने का खतरा बना रहता है। इस समस्या से निपटने के लिए, सेबी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक का उपयोग कर संदिग्ध खातों और गतिविधियों की निगरानी कर रहा है।


निवेशकों की सुरक्षा के लिए कदम

निवेशकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अन्य उपाय भी किए जा रहे हैं। लघु एवं मझोला उद्यम (एसएमई) कंपनियों की सूचीबद्धता के संदर्भ में, पांडेय ने कहा कि नियामक ने इस ढांचे को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई बदलावों का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ पुरानी सूचीबद्ध कंपनियां अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं।


विदेशी निवेशकों के लिए नई दिशा

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के संदर्भ में, पांडेय ने कहा कि नियामक आने वाले कुछ हफ्तों में एक और परामर्श पत्र जारी कर सकता है। इसमें विशेष रूप से खुलासा संबंधी नियम और निवेश या जोखिम की सीमा संबंधी प्रस्ताव शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक विभिन्न बाजारों में निवेश करते हैं और उनके निर्णय डॉलर के बाद कर-बाद रिटर्न पर निर्भर करते हैं।


निवेश निर्णयों पर प्रभाव डालने वाले कारक

कंपनियों की कमाई की संभावनाएं, नए क्षेत्रों का विकास, मुद्रा विनिमय दरों में बदलाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और वैश्विक बॉण्ड प्रतिफल भी उनके निवेश निर्णयों को प्रभावित करते हैं। पांडेय के अनुसार, सेबी का उद्देश्य भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों के लिए पंजीकरण से लेकर निवेश जारी रखने तक की प्रक्रिया को सरल बनाना है। सेबी के प्रयासों का लक्ष्य निष्क्रिय और संदिग्ध कंपनियों पर अंकुश लगाना और विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करते हुए भारतीय पूंजी बाजार की पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करना है।