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सेबी ने अडानी समूह की कंपनियों के खिलाफ कार्यवाही का निपटारा किया

भारतीय बाजार नियामक सेबी ने अडानी समूह की चार कंपनियों सहित पांच कंपनियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही का निपटारा कर दिया है। इस मामले में कंपनियों ने मिलकर 1.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। सेबी की कार्यवाही हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों से संबंधित थी। जानें इस मामले में क्या हुआ और कंपनियों ने किस तरह से कार्यवाही का निपटारा किया।
 

सेबी की कार्यवाही का निपटारा

भारतीय बाजार नियामक सेबी ने अडानी समूह की चार कंपनियों सहित कुल पांच कंपनियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया है। यह मामला उन कंपनियों द्वारा संबंधित पक्षों के साथ हुए कुछ लेन-देन की जानकारी को सार्वजनिक करने में कथित चूक से जुड़ा था। इन कंपनियों ने मामले को सुलझाने के लिए मिलकर लगभग 1.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।


जानकारी के अनुसार, सेबी की यह कार्यवाही अमेरिकी शोध संस्था हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में उठाए गए आरोपों और कंपनी संचालन से संबंधित मुद्दों की जांच के दौरान सामने आई थी। नियामक ने संबंधित पक्षों के बीच लेन-देन की जानकारी देने से जुड़े नियमों और उस समय लागू लिस्टिंग समझौते के संभावित उल्लंघन की भी जांच की थी।


जिन कंपनियों के खिलाफ यह कार्यवाही हुई, उनमें अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी टोटल गैस, ए डब्ल्यू एल एग्री बिजनेस, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस शामिल हैं। ए डब्ल्यू एल एग्री बिजनेस को पहले अडानी विल्मर के नाम से जाना जाता था, जबकि अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस का पुराना नाम अडानी ट्रांसमिशन था।


सेबी के आदेश के अनुसार, अडानी एंटरप्राइजेज ने 76.05 लाख रुपये का भुगतान किया है, जबकि अडानी ग्रीन एनर्जी ने 45.50 लाख रुपये दिए हैं। अडानी टोटल गैस, ए डब्ल्यू एल एग्री बिजनेस और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने 9.75-9.75 लाख रुपये का भुगतान कर कार्यवाही का निपटारा किया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि संबंधित पक्षों के साथ लेन-देन में कंपनियों से पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, क्योंकि इनमें कंपनी से जुड़े व्यक्ति या संस्थान शामिल हो सकते हैं। शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के लिए ऐसे मामलों की जानकारी तय नियमों के अनुसार सार्वजनिक करना आवश्यक होता है, ताकि निवेशकों को कंपनी की गतिविधियों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।


सेबी के आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि कार्यवाही केवल संबंधित पक्षों के साथ कुछ लेन-देन की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने के आरोप तक सीमित नहीं थी। इसमें कुछ मामलों की भी जांच की गई, जहां लेखा जांच या सीमित समीक्षा से जुड़ी रिपोर्ट ऐसी लेखा कंपनियों द्वारा हस्ताक्षरित की गई थीं, जिनके पास वैध सहकर्मी रिव्यू सर्टिफिकेट नहीं था।


हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद अडानी समूह की कंपनियों से जुड़े कई नियामकीय और कानूनी मामलों की विभिन्न स्तरों पर जांच की गई है। सेबी ने इससे संबंधित विभिन्न मामलों में समय-समय पर आदेश भी जारी किए हैं। सितंबर 2026 में भी नियामक की सूची में हिंडनबर्ग रिपोर्ट से जुड़े अडानी मामले की पूर्व कार्यवाही दर्ज है।


हालांकि, इस मामले का निपटारा होने का मतलब यह नहीं है कि रिपोर्ट में लगाए गए सभी आरोपों की पुष्टि हुई है। मौजूदा कार्यवाही विशेष रूप से संबंधित पक्षों के लेन-देन की जानकारी और लेखा संबंधी नियमों के कथित उल्लंघनों पर केंद्रित थी। सेबी के निपटारे के बाद अब इन पांच कंपनियों से जुड़ी यह विशेष कार्यवाही समाप्त हो गई है और मामले से जुड़े नियमों के पालन पर बाजार की नजरें बनी हुई हैं।