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सेबी ने निपटान प्रक्रिया में सुधार के लिए नए प्रस्ताव पेश किए

सेबी ने अपनी निपटान प्रक्रिया में सुधार के लिए नए प्रस्ताव पेश किए हैं, जिसमें 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक व्यवस्था और कई अन्य महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। यह कदम नियामकीय मामलों के निपटान को सरल और तेज बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रस्तावित ढांचे में निपटान राशि को न्यूनतम जुर्माने से जोड़ने का भी सुझाव दिया गया है। सेबी ने इन प्रस्तावों पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं, जो चार सितंबर तक जारी रहेंगी।
 

सेबी के नए निपटान प्रस्ताव

पूंजी बाजार के नियामक सेबी ने शुक्रवार को अपनी निपटान प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलावों का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव में 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों के लिए एक ‘फास्ट-ट्रैक’ व्यवस्था शुरू करने और कई नियामकीय कार्यवाहियों के एक साथ निपटान पर लगने वाली अतिरिक्त 20 प्रतिशत राशि को हटाने का सुझाव शामिल है। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक परामर्श पत्र में मौजूदा सेबी (निपटान कार्यवाही) विनियमन, 2018 के स्थान पर एक नया ढांचा लाने का प्रस्ताव रखा है।


इसका मुख्य उद्देश्य नियामकीय मामलों के निपटान को अधिक सरल, त्वरित और स्पष्ट बनाना है। प्रस्तावित फास्ट-ट्रैक व्यवस्था के तहत 10 लाख रुपये तक की निपटान राशि वाले मामलों में उच्चाधिकार प्राप्त सलाहकार समिति (एचपीएसी) की बैठक की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसे मामले सीधे आंतरिक समिति के पूर्णकालिक सदस्यों के पैनल को भेजे जा सकेंगे।


सेबी के अध्ययन के अनुसार, जिन मामलों में निपटान प्रस्ताव खारिज या वापस लिए गए और बाद में नियामकीय कार्रवाई में जुर्माना लगाया गया, उनमें प्रस्तावित निपटान राशि अंतिम जुर्माने की राशि से औसतन लगभग आठ गुना अधिक थी। नए ढांचे में इसे घटाकर लगभग चार गुना करने की योजना है। सेबी ने निपटान राशि को प्रतिभूति कानूनों के तहत निर्धारित न्यूनतम जुर्माने से जोड़ने का भी सुझाव दिया है।


आवेदक की श्रेणी के अनुसार विभिन्न गुणक लागू होंगे। गलत तरीके से अर्जित लाभ या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली जारी रहेगी। नियामक ने राहत देने वाले कारकों की अधिकतम संख्या को तीन से बढ़ाकर पांच करने का सुझाव दिया है।


इनमें कंपनी के नियंत्रण या प्रबंधन में बदलाव और आवेदक का स्वतंत्र निदेशक होना जैसे कारक शामिल किए जा सकते हैं। गलत तरीके से अर्जित लाभ की वापसी पर ब्याज के संबंध में सेबी ने अंतिम आदेश न होने की स्थिति में लेनदेन की तारीख से निपटान आवेदन दाखिल करने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज का प्रस्ताव किया है। अंतिम आदेश जारी होने पर लेनदेन की तारीख से आदेश तक नौ प्रतिशत और उसके बाद आवेदन दाखिल करने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज लगाया जाएगा।


इसके अतिरिक्त, ब्याज पर ब्याज नहीं लिया जाएगा। सेबी ने लंबित मामलों में निपटान आवेदन दाखिल करने की मौजूदा 60 दिन की समयसीमा को बढ़ाने का भी प्रस्ताव किया है। नियामक ने इन प्रस्तावों पर चार सितंबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की हैं।