सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स पर लगाया अंतरिम आदेश, वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके प्रमुख राजेश मेहता के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में एक अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में गड़बड़ी, धन के प्रवाह में अनियमितताएँ और निवेशकों को गलत जानकारी देने के आरोप लगाए हैं। इस मामले ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है, खासकर जब कंपनी का समेकित राजस्व लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के गलत तरीके से प्रस्तुत होने का संदेह है। आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Jun 3, 2026, 23:42 IST
राजेश एक्सपोर्ट्स पर सेबी का बड़ा कदम
भारत के पूंजी बाजार में एक महत्वपूर्ण घटना घटित हुई है, जिसमें भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और इसके अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक राजेश मेहता के खिलाफ एक अंतरिम आदेश जारी किया है। सेबी ने कंपनी के वित्तीय विवरणों में कथित अनियमितताओं, धन के प्रवाह में गड़बड़ी और निवेशकों को गलत जानकारी देने के आरोप लगाए हैं।
सेबी के आदेश की मुख्य बातें
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वर्ष्णेय द्वारा जारी 109 पृष्ठों के आदेश में कहा गया है कि कंपनी ने कई वर्षों तक गैर-वास्तविक लेनदेन दर्ज किए और अनुचित लेखांकन पद्धतियों का पालन किया। इसके अलावा, कंपनी के धन को प्रमोटर से जुड़े और व्यक्तिगत खातों के माध्यम से स्थानांतरित किया गया, और कई महत्वपूर्ण जानकारियों का खुलासा नहीं किया गया।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर सवाल
राजेश एक्सपोर्ट्स, जो देश की प्रमुख स्वर्ण प्रसंस्करण और आभूषण निर्यात कंपनियों में से एक मानी जाती है, के खिलाफ यह मामला निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। सेबी के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच कंपनी ने लगभग 15.15 लाख करोड़ रुपये के समेकित राजस्व को गलत तरीके से प्रस्तुत किया हो सकता है, जो कि कंपनी द्वारा बताए गए कुल समेकित राजस्व का लगभग 99.80 प्रतिशत है।
विदेशी सहायक इकाइयों से जुड़े राजस्व आंकड़े
सेबी ने विशेष रूप से कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों से जुड़े राजस्व आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। जांच में पाया गया कि कंपनी के कुल समेकित राजस्व का 97 से 99 प्रतिशत हिस्सा विदेशी इकाइयों, विशेषकर वालकांबी एसए, से दिखाया गया था। हालांकि, उपलब्ध वित्तीय दस्तावेजों में इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
व्यक्तिगत लेनदेन और धन का स्थानांतरण
सेबी ने यह भी आरोप लगाया है कि राजेश मेहता द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर किए गए वायदा कारोबार को कंपनी की बिक्री और खरीद के रूप में दर्शाया गया। इसके अलावा, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से हुई आय और व्यय को भी संचालन से प्राप्त आय के रूप में दर्ज किया गया था।
जांच में सहयोग की कमी
जांच के दौरान, कंपनी ने समेकित स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया और विभिन्न चरणों में विरोधाभासी जानकारी प्रस्तुत की। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सेबी ने कंपनी के वैधानिक लेखा परीक्षकों की भूमिका की जांच के लिए राष्ट्रीय वित्तीय प्रतिवेदन प्राधिकरण को भी आदेश की प्रति भेजी है।
निवेशकों की नजरें आगे की कार्रवाई पर
राजेश मेहता को अगले आदेश तक कंपनी के शेयरों की खरीद-बिक्री या किसी भी प्रकार के कारोबार से रोक दिया गया है। सेबी ने नए सिरे से फोरेंसिक लेखा परीक्षण कराने का भी निर्देश दिया है। इस मामले की आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं।