सेबी ने वित्तीय बाजार के लिए साझा विज्ञापन संहिता की घोषणा की
सेबी की नई विज्ञापन संहिता
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने वित्तीय बाजार के मध्यस्थों, जैसे शेयर ब्रोकर और समाशोधन निगमों के लिए एक साझा विज्ञापन संहिता जारी की है। इस संहिता के तहत, इन संस्थाओं को अपने ब्रांड या कंपनी के प्रचार में प्रसिद्ध हस्तियों को शामिल करने की अनुमति दी गई है, लेकिन किसी विशेष वित्तीय उत्पाद या सेवा का समर्थन करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। यह संहिता शेयर ब्रोकर, डिपॉजिटरी प्रतिभागियों, निवेश सलाहकारों, शोध विश्लेषकों, ऑनलाइन बॉण्ड मंच संचालकों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, म्यूचुअल फंड और परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों पर लागू होगी.
हस्तियों के प्रचार की शर्तें
सेबी ने आठ अक्टूबर को जारी अधिसूचना में कहा है कि हस्तियों को केवल ब्रांड या इकाई के स्तर पर प्रचार करने की अनुमति होगी। इस प्रकार के प्रचार में विनियमित इकाई द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं या उत्पादों के नाम शामिल हो सकते हैं, लेकिन किसी विशेष उत्पाद या सेवा के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रचार नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, विज्ञापन में शामिल हस्तियों के लिए संबंधित पर्यवेक्षी निकाय से पहले मंजूरी लेना आवश्यक होगा। यदि कोई निकाय नहीं है, तो सेबी से अनुमति लेनी होगी.
ग्राहकों पर बोझ नहीं
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हस्तियों के प्रचार पर होने वाले खर्च का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और न ही इसे म्यूचुअल फंड योजना से वसूला जाएगा। विज्ञापनों में आवश्यक अस्वीकरण भी शामिल करना अनिवार्य होगा। संबंधित इकाइयों को कुछ शर्तों के तहत विज्ञापनों में केवल पूर्व जोखिम और प्रतिफल के सत्यापन के लिए निर्धारित एजेंसी की रेटिंग या रैंकिंग का उपयोग करने की अनुमति होगी.
डिजिटल माध्यमों के लिए दिशा-निर्देश
सेबी ने डिजिटल प्लेटफार्मों के लिए लघु संदेश सेवा (एसएमएस), तत्काल सूचनाओं और पॉप-अप संदेशों में संक्षिप्त जानकारी देने की अनुमति दी है। हालांकि, इनमें जोखिम से संबंधित विस्तृत जानकारी वाले पृष्ठ के लिंक देना अनिवार्य होगा। यदि कोई विज्ञापन संक्षिप्त इलेक्ट्रॉनिक संदेश के रूप में है और उसमें बुनियादी विवरण देना संभव नहीं है, तो संबंधित इकाई की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध इन विवरणों और अस्वीकरण का लिंक प्रदान करना होगा.
अन्य नियमों में संशोधन
सेबी ने मध्यस्थों से संबंधित नियमों में संशोधन किया है। इसके अलावा, शोध विश्लेषकों और शोध संस्थाओं के लिए संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की अनिवार्यता में भी ढील दी गई है। इस कदम से कारोबार करना आसान होने और शोध विश्लेषकों तथा संस्थाओं पर अनुपालन संबंधी जिम्मेदारियों में कमी आने की उम्मीद है.