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सेबी ने समापन नीलामी सत्र में बदलाव के लिए 3,500 टिप्पणियां प्राप्त कीं

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बताया कि उन्हें समापन नीलामी सत्र में प्रस्तावित परिवर्तनों पर 3,500 से अधिक टिप्पणियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों का अध्ययन करने के बाद जल्द ही नई रूपरेखा जारी की जाएगी। पांडेय ने सीएएस के उद्देश्य और बाजार प्रतिभागियों से राय मांगने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा, उन्होंने बांड बाजार के विकास और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश को सरल बनाने के उपायों पर चर्चा की।
 

सेबी के चेयरमैन का बयान

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने शनिवार को जानकारी दी कि सेबी को समापन नीलामी सत्र (सीएएस) में प्रस्तावित परिवर्तनों पर 3,500 से अधिक टिप्पणियां मिली हैं। उन्होंने कहा कि इन टिप्पणियों का अध्ययन करने के बाद जल्द ही नई रूपरेखा जारी की जाएगी। सेबी ने सीएएस, बाजार के समय और वायदा एवं विकल्प खंड में अनुबंधों के निपटान प्रक्रिया से संबंधित कुछ पहलुओं की समीक्षा के लिए जनता से सुझाव मांगे थे। सुझाव देने की अंतिम तिथि 3 अक्टूबर है।


सीएएस पर अंतिम रूपरेखा

जब पांडेय से पूछा गया कि सीएएस पर अंतिम रूपरेखा कब जारी की जाएगी, तो उन्होंने कहा कि नियामक टिप्पणियों की त्वरित समीक्षा के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, 'आज अंतिम तिथि है और हम सभी टिप्पणियों पर ध्यान देंगे और आगे बढ़ेंगे, क्योंकि हमारे प्रस्ताव स्पष्ट हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि परामर्श पत्र में प्रस्ताव स्पष्ट रूप से परिभाषित हैं, जिससे टिप्पणियों को संकलित करने में अधिक समय नहीं लगेगा।


सीएएस व्यवस्था की समीक्षा

सेबी ने सितंबर में सीएएस व्यवस्था और सूचकांक तथा शेयर डेरिवेटिव के समाप्ति वाले दिन निपटान मूल्य निर्धारित करने की प्रक्रिया में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। यह समीक्षा इक्विटी नकदी खंड में सीएएस के कार्यान्वयन और डेरिवेटिव के निपटान मूल्य पर इसके प्रभाव को लेकर उठी चिंताओं के बाद की गई। सीएएस का मुख्य उद्देश्य नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से शेयरों के समापन मूल्य का निर्धारण करना है।


बाजार प्रतिभागियों से राय

पांडेय ने कहा कि इस समीक्षा का उद्देश्य कुछ विशिष्ट मुद्दों का समाधान करना है और इसके लिए बाजार प्रतिभागियों से विभिन्न संभावित तरीकों पर राय मांगी गई है। उन्होंने बताया कि परामर्श प्रक्रिया को एक विशेष समस्या के समाधान के लिए तैयार किया गया था, जिससे प्रतिभागियों को समाधान के विभिन्न तरीके सुझाने का अवसर मिला।


बॉंड बाजार का विकास

पांडेय ने कॉरपोरेट बॉंड डेरिवेटिव बाजार के विकास पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के विकास के लिए नियामकीय व्यवस्था, तकनीकी बुनियादी ढांचा और बाजार में भागीदारी तीनों महत्वपूर्ण हैं। सेबी बांड बाजार में एक्सचेंज के माध्यम से कारोबार को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रहा है, जैसे कि प्राथमिक निर्गमों में इलेक्ट्रॉनिक बोली मंच की शुरुआत और द्वितीयक बाजार में लेनदेन के लिए 'कोटेशन' मांगने की व्यवस्था को मजबूत करना।


विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का प्रवाह

पांडेय ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के निवेश प्रवाह के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सेबी की भूमिका एफपीआई के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश और कारोबार को सरल बनाना है, जबकि निवेश संबंधी निर्णय विभिन्न देशों में उपलब्ध मुनाफे और निवेश अवसरों पर निर्भर करते हैं।


आरबीआई के साथ सहयोग

पांडेय ने कहा कि सेबी एफपीआई के लिए बाजार तक पहुंच को और आसान बनाने के उपायों पर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ मिलकर काम कर रहा है। नियामक ने पहले ही कई कदम उठाए हैं, जिनमें एफपीआई को गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में निवेश की अनुमति देना शामिल है। उन्होंने कहा कि विभिन्न बाजारों में उपलब्ध निवेश अवसरों के आधार पर एफपीआई की हिस्सेदारी बढ़ या घट सकती है।


नियामकीय स्तर पर प्रयास

पांडेय ने कहा, 'नियामकीय स्तर पर हम केवल एफपीआई की बात सुन सकते हैं, उनके प्रवेश और बाजार तक पहुंच को आसान बना सकते हैं।'