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सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट: निवेश का सुनहरा अवसर

सोने और चांदी की कीमतों में हालिया गिरावट ने निवेशकों के लिए एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत किया है। गिरावट का मुख्य कारण खुदरा महंगाई में वृद्धि है, जो 22 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तब तक कीमतों में सीमित वृद्धि देखने को मिलेगी। इस स्थिति को निवेश के अवसर के रूप में देखना चाहिए।
 

सोने-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट


सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय कमी आई है, जो खरीदारों के लिए एक बेहतरीन निवेश का अवसर हो सकता है। गिरावट का सिलसिला सुबह से शुरू हुआ, लेकिन शाम तक यह और भी गहरा गया।


कीमतों में गिरावट का विवरण

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमत 1 फीसदी से अधिक गिरकर 1,49,159 रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जिससे सोना 2000 रुपए सस्ता हो गया। पिछले सत्र में सोने की कीमत 1,51,499 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, चांदी की कीमत में भी गिरावट आई, जो 2500 रुपए प्रति किलो घटकर 223000 रुपए प्रति किलो हो गई। शुरुआत में चांदी की कीमत में 1400 रुपए की कमी आई थी, लेकिन बाद में यह और भी गिरी।


गिरावट के कारण

सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण देश और विदेश में खुदरा महंगाई का बढ़ना है। सोमवार को भारत में खुदरा महंगाई के आंकड़े जारी हुए, जो 22 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54% तक पहुंच गई, जो अगस्त में 4.82% थी।


खुदरा महंगाई का प्रभाव

जब खुदरा महंगाई बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में कटौती को टाल देते हैं। हाल ही में आरबीआई ने रेपो रेट में वृद्धि की घोषणा की थी। ब्याज दरों में वृद्धि से बॉंड यील्ड और बैंक की योजनाओं में निवेश करने पर बेहतर रिटर्न मिलता है, जिससे सोने और चांदी की मांग में कमी आती है।


चांदी की कीमत में गिरावट

हाल के दिनों में चांदी की कीमत में गिरावट चौंकाने वाली रही है। जनवरी में चांदी ने 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर छुआ था, लेकिन अब यह लगातार गिर रही है। बढ़ती महंगाई, ऊंची ब्याज दरें और औद्योगिक मांग में कमी इसके प्रमुख कारण हैं। सोमवार को चांदी की कीमत 1.96 लाख रुपए घटकर 2,23,326 लाख रुपए पर आ गई।


विशेषज्ञों की राय

बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक खुदरा महंगाई पर नियंत्रण नहीं पाया जाता और बैंक ब्याज दरों में कमी के संकेत नहीं मिलते, तब तक सोने और चांदी की कीमतों में सीमित वृद्धि देखने को मिलेगी। विशेषज्ञों का सुझाव है कि निवेशकों को इस गिरावट को एक अवसर के रूप में देखना चाहिए और खरीदारी करनी चाहिए।