सोने और चांदी की कीमतों में भारी उछाल, ईरान-अमेरिका तनाव का असर
सोने और चांदी में तेजी का कारण
इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के चलते शेयर बाजारों में हलचल मची हुई है, जिससे कीमती धातुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। सोमवार को वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में 4 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई।
सोने-चांदी की कीमतों में विस्फोटक वृद्धि
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सुरक्षित निवेश की मांग में वृद्धि हुई है, जिससे सोमवार को वायदा कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में लगभग चार प्रतिशत की तेजी आई। इस दौरान चांदी की कीमत 2.93 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जबकि सोने की कीमत 1.68 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गई।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इज़राइल के समन्वित हमलों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने भी पश्चिम एशिया के विभिन्न देशों में अपने ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए हैं। इस स्थिति में निवेशकों ने जोखिम भरे निवेशों से दूरी बनाते हुए सोने और चांदी की ओर रुख किया। मल्टी-कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर मई डिलीवरी वाली चांदी का वायदा भाव 10,508 रुपये यानी 3.72 प्रतिशत बढ़कर 2,93,152 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।
वहीं, अप्रैल अनुबंध के लिए सोने की कीमत 5,811 रुपये यानी 3.6 प्रतिशत बढ़कर 1,67,915 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक मानव मोदी ने बताया कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद सोने और चांदी के वायदा में तेजी आई।
वैश्विक बाजार में भी तेजी
वैश्विक बाजार में भी कीमती धातुओं के वायदा कारोबार में तेजी का रुख देखा गया। मई डिलीवरी के लिए कॉमेक्स चांदी वायदा चार डॉलर यानी 4.3 प्रतिशत बढ़कर 97.30 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि सोना 161.8 डॉलर यानी 3.08 प्रतिशत चढ़कर 5,409.7 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक जिगर त्रिवेदी ने कहा कि इन हमलों के कारण क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी है और तेल-समृद्ध खाड़ी क्षेत्र में समुद्री यातायात प्रभावित हुआ है।
सुरक्षित निवेश की मांग में वृद्धि
इस स्थिति में सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई, जो एक महीने से अधिक का उच्चतम स्तर है। त्रिवेदी ने बताया कि फरवरी में सोने ने लगातार सातवें महीने लाभ दर्ज किया, जो 1973 के बाद से सबसे लंबा तेजी का दौर है। यह वृद्धि भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की मजबूत खरीद और निवेशकों के सरकारी बॉंड और मुद्राओं से दूरी बनाने के कारण हुई।