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सोने और चांदी की कीमतों में स्थिरता: फेडरल रिजर्व के सख्त रुख का असर

गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों ने डॉलर को मजबूती दी है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी है और कैसे बाजार पर इसका प्रभाव पड़ रहा है।
 

सोने की कीमतों में स्थिरता


नई दिल्ली: गुरुवार को सोने की कीमतों में कोई बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया, और यह लगभग एक सप्ताह के निचले स्तर पर स्थिर कारोबार करता नजर आया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदों ने डॉलर को मजबूती प्रदान की, जिसका सीधा प्रभाव सोने की कीमतों पर पड़ा। 24 सितंबर की सुबह लगभग 5:50 बजे स्पॉट गोल्ड 4,288.13 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा। पिछले कारोबारी सत्र में सोने की कीमत में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी।


स्पॉट सिल्वर भी लगभग 0.5 प्रतिशत गिरकर 64 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। भारतीय बाजार में, रिपोर्ट लिखे जाने तक कीमती धातुओं का कारोबार शुरू नहीं हुआ था, लेकिन मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स क्रमशः 1,51,360 रुपये प्रति 10 ग्राम और 2,36,085 रुपये प्रति किलो पर सेटल हुए।


फेडरल रिजर्व का सख्त रुख

फेड के सख्त रुख का सोने पर दबाव


इस सप्ताह फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं ने एक सख्त रुख अपनाया। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने कहा कि केंद्रीय बैंक को मौजूदा ऊर्जा झटकों को अस्थायी न मानकर इसे लंबे समय तक चलने वाली महंगाई का कारण मानना चाहिए।


बाजार अब अक्टूबर में होने वाली FOMC बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की लगभग 70 प्रतिशत संभावना देख रहा है। जब ब्याज दरों में वृद्धि की उम्मीद बढ़ती है, तो डॉलर और बॉंड यील्ड को समर्थन मिलता है, जिससे सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की लागत बढ़ जाती है।


डॉलर की मजबूती का प्रभाव

डॉलर की मजबूती ने बढ़ाया दबाव


ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती उम्मीदों के बीच अमेरिकी डॉलर भी मजबूत होकर आठ हफ्तों के उच्चतम स्तर को पार कर गया। डॉलर की मजबूती आमतौर पर सोने पर दबाव डालती है, क्योंकि इससे अन्य मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसके साथ ही, अमेरिकी 10 साल की बॉंड यील्ड भी 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर के करीब बनी रही, जिससे निवेशकों के लिए ब्याज देने वाली संपत्तियां अधिक आकर्षक हो गईं।