सोने और चांदी के ईटीएफ में गिरावट, भारतीय बाजार पर असर
सोने और चांदी में गिरावट का प्रभाव
सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को आई तेज गिरावट का प्रभाव भारत में उनके एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) पर भी स्पष्ट रूप से देखा गया। चांदी से संबंधित ईटीएफ में 3.6% तक की कमी आई, जबकि सोने के ईटीएफ में भी 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इस कीमती धातु में कमजोरी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी भारी बिकवाली का माहौल बना।
भारतीय शेयर बाजार की स्थिति
दोपहर 12:10 बजे सेंसेक्स 975 अंक यानी 1.3% गिरकर 72,920 पर पहुंच गया। इसी समय निफ्टी 310 अंक की गिरावट के साथ 22,830 पर कारोबार कर रहा था। बाजार में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने के कारण निवेशकों का ध्यान बढ़ती तेल कीमतों और महंगाई पर पड़ने वाले प्रभाव पर केंद्रित रहा।
ईटीएफ में गिरावट के प्रमुख कारण
चांदी से जुड़े ईटीएफ में एसबीआई सिल्वर ईटीएफ सबसे अधिक गिरने वाले फंडों में से एक रहा, जिसमें 3.59% की कमी आई और इसकी कीमत 216.23 रुपये रह गई। निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ 3.57% गिरकर 210.99 रुपये, टाटा सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 3.51% टूटकर 21.43 रुपये और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल सिल्वर ईटीएफ 3.44% गिरकर 220.49 रुपये पर आ गया।
सोने के ईटीएफ पर दबाव
सोने के ईटीएफ पर भी दबाव बना रहा। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल गोल्ड ईटीएफ 2.64% गिरकर 125.63 रुपये पर पहुंच गया। एसबीआई गोल्ड ईटीएफ में 2.55% की गिरावट आई और यह 125.16 रुपये पर रहा। निप्पॉन इंडिया ईटीएफ गोल्ड बीईईएस 2.45% गिरकर 121.38 रुपये और टाटा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड 2.26% नीचे 14.29 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव
मौजूदा जानकारी के अनुसार, भारत में ईटीएफ की गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई तेज कमजोरी के अनुरूप रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 2.1% गिरकर 4,198.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी सोने के वायदा भाव में भी 2.1% की गिरावट रही और यह 4,231 डॉलर पर पहुंच गया। वहीं, हाजिर चांदी 3.4% टूटकर 62.08 डॉलर प्रति औंस रह गई।
घरेलू वायदा बाजार की स्थिति
घरेलू वायदा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। सितंबर 2026 डिलीवरी वाली चांदी 6,661 रुपये गिरकर 2,28,035 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला सोना 3,214 रुपये टूटकर 1,47,667 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
कच्चे तेल की कीमतों का प्रभाव
इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी एक महत्वपूर्ण कारण बनी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के साथ संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके बाद ब्रेंट कच्चे तेल का भाव 3.43 डॉलर यानी 3.29% बढ़कर 107.75 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
महंगाई की चिंता
तेल की महंगाई से महंगाई बढ़ने की चिंता भी बढ़ गई है। इसी कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी की संभावना पर बाजार की नजर है। इस महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर इसे 3.75% से 4% के दायरे में किया था। सीएमई के फेडवॉच आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में एक और बढ़ोतरी की संभावना 68% मानी जा रही है।
ब्याज दरों का प्रभाव
ब्याज दरें बढ़ने पर सोने और चांदी जैसी संपत्तियों को नुकसान होता है, जिनसे नियमित आय नहीं मिलती। दूसरी ओर, डॉलर करीब 2 महीने के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। प्लैटिनम 2.7% गिरकर 1,730.78 डॉलर और पैलेडियम 2.8% टूटकर 1,231.46 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दबाव केवल सोने और चांदी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी कीमती धातु बाजार में कमजोरी बनी हुई है।