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सोने-चांदी की कीमतों पर अमेरिकी मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव

इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव पड़ने की संभावना है। विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक इन घटनाक्रमों पर ध्यान देंगे। अमेरिका के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े 11 सितंबर को जारी होंगे, जो सर्राफा बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे। जानें कि कैसे ये कारक सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
 

सोने-चांदी की कीमतों के निर्धारक कारक

नई दिल्ली, 6 सितंबर: अमेरिका में आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़े, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक होंगे, ऐसा विश्लेषकों का मानना है। वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अटकलों के बीच निवेशक इन घटनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे।


निवेशक जर्मनी और चीन के उपभोक्ता मूल्य आंकड़ों, यूरो क्षेत्र, जापान और ब्रिटेन के जीडीपी आंकड़ों के साथ-साथ चीन के व्यापार आंकड़ों पर भी नजर रखेंगे। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रणव मेर ने कहा, 'ब्याज दरों के संदर्भ में अटकलों के बीच अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़े सर्राफा बाजार के लिए महत्वपूर्ण होंगे।' अमेरिका का अगस्त 2026 का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 11 सितंबर को जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सोने के लिए 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर प्रतिरोध और चांदी के लिए 2.31 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर समर्थन स्तर है।


पिछले सप्ताह वायदा बाजार में सोने की कीमत 3,514 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत घटकर 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई, जबकि चांदी 4,786 रुपये यानी लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रही। एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष और शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर बढ़ाने के संकेतों के चलते मुनाफावसूली के कारण सप्ताह के पहले हिस्से में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने में उतार-चढ़ाव देखा गया। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स सोना वायदा सप्ताहांत में लगभग 1.2 प्रतिशत गिरकर 4,476.6 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।


न्यूयॉर्क में चांदी की कीमत 1.52 प्रतिशत घटकर 66.75 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस रही। मेर ने बताया कि अमेरिका के बेहतर रोजगार आंकड़ों के बाद इस महीने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़ गई, जिससे शुक्रवार को सोने की कीमतों पर दबाव बना। ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग ने कहा कि भू-राजनीतिक चिंताएं अब पारंपरिक सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ाने के बजाय ब्याज दरों के लिए जोखिम के रूप में उभर रही हैं।


हालांकि, फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वालर की नरम टिप्पणियों और ईरान से जुड़े तनाव के सीमित रहने के संकेतों ने दर बढ़ोतरी की उम्मीदों को कम किया, जिससे अमेरिकी डॉलर और बॉंड प्रतिफल में गिरावट आई। गर्ग ने कहा कि चांदी में दोनों दिशाओं में अधिक उतार-चढ़ाव देखा गया, क्योंकि इसकी औद्योगिक मांग भी ब्याज दरों के रुख से प्रभावित होती है। इस बीच, विश्व के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने का कार्य जारी रखे हुए हैं।


विश्व स्वर्ण परिषद के आंकड़ों के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने 20 टन सोना खरीदा है। यह लगातार 21वां महीना है जब उसने सोने की खरीद की है। इस प्रकार, 2026 में अब तक उसकी कुल खरीद 60 टन हो गई है और कुल स्वर्ण भंडार 2,366 टन तक पहुंच गया है।