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स्कूलों में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता की शिक्षा का नया अध्याय

स्कूलों में अब छात्रों को व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता की शिक्षा दी जाएगी, जिससे वे पैसे के सही उपयोग और व्यवसाय शुरू करने की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। एनसीईआरटी ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की किताब में नए अध्याय जोड़े हैं, जिनमें बचत, निवेश, आयकर और कर्ज की जानकारी शामिल है। यह बदलाव छात्रों को वित्तीय निर्णय लेने में सक्षम बनाएगा और उन्हें व्यवसाय की दुनिया से परिचित कराएगा।
 

नई पाठ्यक्रम में वित्तीय शिक्षा का समावेश

अब स्कूली छात्रों को केवल किताबों में अर्थव्यवस्था और बाजार के सामान्य सिद्धांतों का अध्ययन नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उन्हें अपने जेब खर्च का सही उपयोग और व्यवसाय शुरू करने की जानकारी भी मिलेगी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई किताब में व्यक्तिगत वित्त और उद्यमिता से संबंधित दो नए अध्याय जोड़े हैं। इन अध्यायों के माध्यम से छात्रों को बचत, निवेश, आयकर, कर्ज की किस्तों और व्यवसाय शुरू करने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराया जाएगा.


अर्थशास्त्र में नए अध्यायों का उद्देश्य

अर्थशास्त्र विषय के अंतर्गत जोड़े गए अध्यायों के शीर्षक 'अपने व्यक्तिगत वित्त का प्रबंधन' और 'विचारों से स्टार्टअप तक' हैं। इनका उद्देश्य छात्रों को कम उम्र से ही पैसे के सही उपयोग और व्यवसाय की बुनियादी समझ प्रदान करना है, ताकि वे भविष्य में अपनी आमदनी, खर्च और बचत से संबंधित निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें.


व्यक्तिगत वित्त के प्रमुख विषय

व्यक्तिगत वित्त से संबंधित अध्याय में पांच मुख्य विषयों पर जानकारी दी गई है, जिनमें आमदनी, बजट बनाना, बचत, निवेश और सुरक्षा के साथ जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। छात्रों को सावधि जमा, सरकारी बचत योजनाओं, बॉंड, शेयर और म्यूचुअल फंड जैसे निवेश विकल्पों के बारे में बताया जाएगा। महंगाई, चक्रवृद्धि ब्याज और जोखिम के मुकाबले मिलने वाले लाभ को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया जाएगा.


आयकर और कर्ज की जानकारी

इस अध्याय में बीमा, कर्ज लेने और क्रेडिट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ भी शामिल हैं। छात्रों को समान मासिक किस्त (ईएमआई) के बारे में भी बताया जाएगा, ताकि वे समझ सकें कि कर्ज लेने पर हर महीने कितना भुगतान करना पड़ता है और इसका बजट पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.


कारोबार की दुनिया से परिचय

दूसरे अध्याय में छात्रों को व्यवसाय की दुनिया से अवगत कराया जाएगा। इसमें भारतीय कंपनियों के उदाहरणों के माध्यम से यह बताया जाएगा कि एक छोटा विचार कैसे व्यवसाय का रूप ले सकता है। व्यवसाय शुरू करने से पहले योजना बनाना, विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों को समझना और लाभ-हानि का हिसाब रखना इसके मुख्य हिस्से हैं.


निवेश में बढ़ती रुचि

यह ध्यान देने योग्य है कि पाठ्यक्रम में इन विषयों को शामिल करने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब देश में आम लोगों की निवेश में रुचि बढ़ रही है। म्यूचुअल फंड में व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के माध्यम से पैसा लगाने का चलन भी बढ़ा है. सितंबर 2026 में एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में 32,490 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.


डिजिटल माध्यमों का प्रभाव

आजकल मोबाइल ऐप और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों ने निवेश को आसान बना दिया है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया और वित्तीय सलाह देने वाले वीडियो के कारण पैसे और निवेश से जुड़े विषय आम चर्चा का हिस्सा बन गए हैं. इसलिए, स्कूल स्तर पर सही जानकारी प्रदान करना आवश्यक है, ताकि बच्चे बिना पूरी समझ के निवेश करने के बजाय उसके जोखिम और लाभ को पहचान सकें.


शिक्षा नीति में बदलाव

एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम रूपरेखा 2023 के तहत किए जा रहे बड़े परिवर्तनों का हिस्सा है. नई किताबों में एआई और कंप्यूटर आधारित सोच जैसे नए विषयों के साथ रोजगार और रोजमर्रा के काम आने वाले कौशल पर भी जोर दिया जा रहा है.