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स्विगी के वित्तीय परिणाम: घाटा कम, लेकिन खर्चों का दबाव बना हुआ

स्विगी ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों में घाटा कम करने का दावा किया है, लेकिन खर्चों में वृद्धि जारी है। कंपनी का शुद्ध घाटा 922 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। हालांकि, बढ़ते खर्चों के कारण कंपनी को अभी भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, प्रतिस्पर्धी कंपनी जोमैटो ने बेहतर नतीजे पेश किए हैं। जानें स्विगी के वित्तीय प्रदर्शन के बारे में और इसके भविष्य की संभावनाओं पर क्या असर पड़ सकता है।
 

स्विगी के वित्तीय प्रदर्शन का विश्लेषण

खाने और किराने के सामान की ऑनलाइन डिलीवरी करने वाली कंपनी स्विगी ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के परिणामों में मिश्रित संकेत दिए हैं। कंपनी का घाटा पिछले वर्ष की तुलना में कम हुआ है, जबकि उसकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फिर भी, तेजी से बढ़ते कारोबार और बढ़ते खर्चों के कारण स्विगी को अभी भी भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। परिणामों की घोषणा के दिन स्विगी के शेयरों में भी गिरावट देखी गई है।


स्विगी ने 22 अक्टूबर को जानकारी दी कि वित्त वर्ष 2026-27 की जुलाई से सितंबर तिमाही में उसका शुद्ध घाटा सालाना आधार पर 15.6% घटकर 922 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में कंपनी को 1,092 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि, पिछली तिमाही के 791 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में इस बार नुकसान बढ़ गया है, जो यह दर्शाता है कि कंपनी की आय बढ़ने के बावजूद खर्चों का दबाव बना हुआ है।


बेंगलुरु स्थित इस कंपनी की परिचालन से होने वाली आय में भी अच्छी वृद्धि देखी गई है। दूसरी तिमाही में स्विगी का राजस्व 36% बढ़कर 7,571 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 5,561 करोड़ रुपये था। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कंपनी ने 6,812 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था।


वहीं, कंपनी का कुल खर्च सालाना आधार पर लगभग 30% बढ़कर 8,703 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष सितंबर तिमाही में यह खर्च 6,711 करोड़ रुपये था, जबकि पिछली तिमाही में यह 7,813 करोड़ रुपये रहा। इसके अलावा, ब्याज, कर, मूल्यह्रास और परिशोधन से पहले समायोजित कमाई में घाटा भी बढ़ा है। यह घाटा पहली तिमाही के 651 करोड़ रुपये से बढ़कर दूसरी तिमाही में 760 करोड़ रुपये हो गया है।


स्विगी के कारोबार में ग्राहकों की संख्या में वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हर महीने लेनदेन करने वाले ग्राहकों की औसत संख्या बढ़कर 2.78 करोड़ हो गई है, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 2.29 करोड़ था। इसका मतलब है कि कंपनी की सेवाओं का उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या में वृद्धि हुई है।


हालांकि, प्रतिस्पर्धी कंपनी जोमैटो ने सितंबर तिमाही में बेहतर परिणाम पेश किए हैं। उसका शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 92% बढ़कर 125 करोड़ रुपये हो गया, जबकि राजस्व 78% बढ़कर 24,138 करोड़ रुपये रहा। उसकी त्वरित सामान डिलीवरी सेवा ब्लिंकिट ने सामान के भंडार का स्वामित्व अपने पास रखने वाला कारोबारी मॉडल अपनाया है।


यह ध्यान देने योग्य है कि स्विगी की त्वरित डिलीवरी सेवा इंस्टामार्ट के तेजी से विस्तार पर कंपनी बड़ी रकम खर्च कर रही है। इस रणनीति से भविष्य में कारोबार बढ़ाने में मदद मिल सकती है, लेकिन फिलहाल इसका असर मुनाफे पर पड़ रहा है। परिणामों की घोषणा के दिन 22 अक्टूबर को स्विगी के शेयर 5.01% गिरकर 211.30 रुपये पर बंद हुए हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि कंपनी बढ़ते राजस्व के साथ अपने खर्चों पर कितना नियंत्रण कर पाती है और घाटे को कम करने में कब तक सफल होती है।