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हरियाणा सरकार का डिजिटल परिवर्तन: पटवारियों के लिए स्मार्ट टैबलेट की खरीद

हरियाणा सरकार ने भूमि और राजस्व कार्यों में सुधार लाने के लिए पटवारियों के लिए 4,000 स्मार्ट टैबलेट खरीदने का निर्णय लिया है। यह कदम किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाएगा और डेटा को सीधे खेतों में दर्ज करने की सुविधा प्रदान करेगा। स्मार्ट टैबलेट में जीपीएस और वॉयस फीचर जैसी सुविधाएं होंगी, जिससे कार्य में तेजी और पारदर्शिता आएगी। जानें इस नई पहल के बारे में और कैसे यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
 

हरियाणा में डिजिटल बदलाव की शुरुआत

चंडीगढ़. हरियाणा सरकार ने भूमि और राजस्व से संबंधित कार्यों में देरी को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायाब सैनी और राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने पटवारियों और कानूनगो के लिए लगभग 4,000 स्मार्ट टैबलेट खरीदने की योजना को मंजूरी दी है। इस पहल का प्रभाव रोहतक, जींद, हिसार और करनाल जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। अब किसानों को अपनी भूमि से संबंधित छोटे कार्यों के लिए सरकारी कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।


कागजी कार्यवाही से मुक्ति और डेटा का त्वरित दर्ज

वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि वर्तमान में पटवारी और कानूनगो को भारी रजिस्टरों और नक्शों के साथ काम करना पड़ता है। इस पुरानी प्रणाली के कारण डेटा एंट्री में देरी और गलतियों की संभावना बनी रहती है। स्मार्ट टैबलेट के माध्यम से अधिकारी सीधे खेत या विवादित स्थल पर जाकर जीपीएस के जरिए सटीक डेटा दर्ज कर सकेंगे। इसके साथ ही, वे मौके की तस्वीरें लेकर तुरंत सरकारी सर्वर पर अपलोड कर सकेंगे, जिससे भ्रष्टाचार में कमी आएगी और कार्य की गति बढ़ेगी।


विशेष सुविधाओं से लैस टैबलेट

सरकार द्वारा खरीदे जा रहे टैबलेट विशेष रूप से फील्ड कार्य के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें तेज इंटरनेट कनेक्टिविटी, बड़ी स्क्रीन और वॉयस-टू-टेक्स्ट फीचर शामिल हैं, जिससे पटवारी बोलकर अपनी रिपोर्ट तैयार कर सकेंगे। जीपीएस की सुविधा से भूमि माप में होने वाली गलतियों को रोका जा सकेगा। लंबी बैटरी लाइफ के कारण दूरदराज के गांवों में बिजली की कमी के बावजूद कार्य बाधित नहीं होगा। सरकार का मानना है कि इस तकनीक से राजस्व विभाग में पूर्ण पारदर्शिता आएगी।


किसानों को होगा सीधा लाभ

राजस्व विभाग के इस आधुनिकीकरण का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के किसानों को होगा। अब गिरदावरी के समय पटवारी को गांव के सरकारी स्कूल या चौपाल में बैठकर रिकॉर्ड दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि वह सीधे खेत में जाकर काम पूरा करेगा। इससे ओलावृष्टि या भारी बारिश के दौरान फसल के नुकसान का आकलन भी जल्दी और सटीक होगा। आम नागरिकों के लिए भूमि के म्यूटेशन और अन्य कागजी प्रक्रियाएं अब पहले से कहीं अधिक तेज और पारदर्शी होंगी।