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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता: नई रिपोर्ट से खुलासा

हालिया रिपोर्ट में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। सर्वे में शामिल ग्राहकों ने क्लेम में देरी और रिजेक्शन की समस्याओं का सामना किया है। रिपोर्ट में कैशलेस विकल्प की मांग और बीमा कंपनियों से सुधार की अपेक्षाएँ भी शामिल हैं। जानें इस रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष और ग्राहकों की संतुष्टि बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम।
 

क्लेम प्रक्रिया में चुनौतियाँ

आजकल स्वास्थ्य बीमा लेना सरल हो गया है, लेकिन क्लेम प्राप्त करने की प्रक्रिया अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पॉलिसीबाजार की हालिया 'हेल्थ क्लेम्स एक्सपीरियंस इंडेक्स' (HCX) रिपोर्ट के अनुसार, क्लेम में देरी और बिना उचित कारण के रिजेक्शन ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच किए गए इस सर्वे में 2,228 व्यक्तियों के अनुभव शामिल हैं। रिपोर्ट में एचसीएक्स स्कोर का उपयोग किया गया है, जो 100 के पैमाने पर कंपनी की सेवा की गुणवत्ता को दर्शाता है। भारत का औसत स्कोर 82.8 है, जो यह दर्शाता है कि क्लेम प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता है।


कैशलेस सुविधा की मांग

सर्वे में यह भी सामने आया है कि अधिकांश लोग कैशलेस विकल्प को प्राथमिकता देते हैं, ताकि बीमा कंपनी सीधे अस्पताल को भुगतान कर सके। हालांकि, 60 प्रतिशत लोग कैशलेस के बजाय खुद भुगतान करके बाद में रिफंड मांगने का विकल्प चुनते हैं। उन्हें चिंता होती है कि कैशलेस अप्रूवल में समय लगेगा, जिससे इलाज में देरी हो सकती है। जब लोग खुद पैसे देते हैं, तो उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सर्वे के अनुसार, 76 प्रतिशत व्यक्तियों को अस्पताल का बिल चुकाने के लिए अपनी बचत का सहारा लेना पड़ता है या कर्ज लेना पड़ता है।


कंपनियों का प्रदर्शन और स्कोर

रिपोर्ट में ग्राहकों के अनुभव को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। पहली श्रेणी में बेहतरीन अनुभव है, जहां स्कोर 90 से ऊपर है। दूसरी श्रेणी में औसत अनुभव है, जिसमें स्कोर 70 से 89.9 के बीच है, जबकि तीसरी श्रेणी में कठिनाई का अनुभव होता है, जहां स्कोर 70 से कम है। डेटा के अनुसार, कैशलेस विकल्प चुनने वाले ग्राहकों का अनुभव उन लोगों की तुलना में बेहतर होता है जो खुद भुगतान करके रिफंड मांगते हैं।


क्लेम रिजेक्शन की समस्या

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि क्लेम रिजेक्शन का एक बड़ा हिस्सा केवल कागजी कमियों के कारण होता है। सर्वे का एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जिन ग्राहकों को क्लेम प्राप्त करने में 15 दिन से अधिक समय लगा, उनका एचसीएक्स स्कोर 65 से नीचे गिर गया, जो एक बेहद खराब अनुभव माना जाता है। ग्राहकों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें सही समय पर यह जानकारी नहीं मिलती कि उनका क्लेम किस स्थिति में है, जिससे वे लगातार चिंतित रहते हैं।


सुधार की आवश्यकता

सर्वे में शामिल ग्राहकों ने बीमा कंपनियों से कुछ महत्वपूर्ण सुधारों की मांग की है। यदि बीमा कंपनियां किसी भी क्लेम को सात दिन के भीतर मंजूर कर दें, तो इससे ग्राहकों की संतुष्टि में 15 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। ग्राहकों का यह भी कहना है कि अस्पतालों की सूची स्पष्ट और संपूर्ण होनी चाहिए ताकि उन्हें कोई संदेह न हो। इसके अलावा, ग्राहकों ने यह भी अनुरोध किया है कि क्लेम फॉर्म भरने की प्रक्रिया को सरल और ऑनलाइन बनाया जाए, ताकि इसे कोई भी आसानी से उपयोग कर सके। यह रिपोर्ट बीमा कंपनियों के लिए एक चेतावनी है कि यदि वे क्लेम प्रक्रिया को तेज और ईमानदारी से नहीं करेंगी, तो भविष्य में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखना उनके लिए मुश्किल होगा।