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BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय: शिक्षा में सहयोग का नया आयाम

दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit 2026 के दौरान BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय की पहल ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग को नया आयाम दिया है। यह नेटवर्क विभिन्न देशों के प्रमुख विश्वविद्यालयों को जोड़ता है और छात्रों के लिए नए अवसर प्रदान करता है। जानें कैसे यह भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक शिक्षा और करियर के नए रास्ते खोल सकता है।
 

नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन

नई दिल्ली: दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS Summit 2026 के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और कूटनीति के मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इस बीच, शिक्षा के क्षेत्र में BRICS से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहल, जिसे BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय कहा जाता है, भी ध्यान आकर्षित कर रही है। हालांकि, यह नाम सुनकर कई लोगों को लगता है कि BRICS देशों ने एक नया विश्वविद्यालय स्थापित किया है, लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है।


शिक्षा में सहयोग को बढ़ावा देना

BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय वास्तव में विभिन्न देशों के प्रमुख विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों का एक व्यापक शैक्षणिक नेटवर्क है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, मिस्र, इथियोपिया और यूएई जैसे सदस्य देशों के संस्थान शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों की आवाजाही, शिक्षकों का आदान-प्रदान, संयुक्त शोध और डुअल डिग्री जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देशों के बीच शिक्षा के सहयोग को मजबूत करना है।


एक साझा मंच, कई प्रमुख संस्थान

इस नेटवर्क की स्थापना 2015 में मास्को में हुई थी। भारत की ओर से IIT बॉम्बे, IIT कानपुर, IISc बैंगलोर, दिल्ली विश्वविद्यालय, JNU और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जुड़े हुए हैं। इसके अलावा, रूस की लामोनोसोव मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी, चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी और ब्राजील की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रासीलिया भी इस सहयोग का हिस्सा हैं।


शिक्षा के विविध क्षेत्र

BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय का ध्यान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित है, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी, क्लीन फ्यूल टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा। इसके अतिरिक्त, BRICS देशों की राजनीति, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन, पोषण, खाद्य सुरक्षा और वैश्विक व्यापार जैसे विषय भी इस नेटवर्क के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हैं।


दिल्ली समिट में संभावित विस्तार

2026 के दिल्ली समिट में नेटवर्क के विस्तार पर चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। ईरान, मिस्र और यूएई जैसे नए सदस्य देशों के प्रमुख विश्वविद्यालयों को इसमें शामिल करने की संभावना है। भारतीय छात्रों के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाने और BRICS संयुक्त शोध कोष के आवंटन को बढ़ाने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है। ये कदम शिक्षा और शोध के अंतरराष्ट्रीय अवसरों को बढ़ावा दे सकते हैं।


भारतीय युवाओं के लिए नेटवर्क का महत्व

पश्चिमी देशों में भारतीय छात्रों के लिए वीजा और उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों की कठिनाइयों के बीच, BRICS देशों के विश्वविद्यालय एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकते हैं। भारतीय छात्रों को अन्य सदस्य देशों के संस्थानों के साथ शोध, अकादमिक आदान-प्रदान और संयुक्त कार्यक्रमों के अवसर मिल सकते हैं। इस प्रकार, BRICS नेटवर्क विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक नेटवर्क नहीं है, बल्कि यह भविष्य में भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक शिक्षा और करियर के नए अवसरों का एक माध्यम बन सकता है।