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एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में मुगलों के खिलाफ संघर्ष का विवरण

एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के लिए एक नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक जारी की है, जिसमें भारतीय इतिहास के मध्यकालीन युग और मुगलों के खिलाफ विभिन्न समुदायों के संघर्षों को प्रमुखता दी गई है। इस पुस्तक में राजपूतों, सिखों, जाटों और मराठों के प्रतिरोध का विस्तृत विवरण है, साथ ही मंदिरों के सामाजिक-आर्थिक योगदान पर भी चर्चा की गई है। जानें इस नई पाठ्यपुस्तक में और क्या खास है।
 

नई पाठ्यपुस्तक का विमोचन

नई दिल्ली: एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के लिए एक नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक जारी की है, जिसमें भारतीय इतिहास के मध्यकालीन युग और मुगल साम्राज्य के खिलाफ विभिन्न समुदायों के प्रतिरोध को प्रमुखता दी गई है। इस पुस्तक का शीर्षक ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2’ है, जिसे मंगलवार को प्रस्तुत किया गया। इसमें 1000 से 1700 ईस्वी के बीच के भारत को ‘रेजिस्टेंस एंड रेजिलिएंस’ अध्याय के अंतर्गत शामिल किया गया है।


राजपूतों और अन्य समुदायों का संघर्ष

पुस्तक में दिल्ली सल्तनत और मुगलों के विस्तार के खिलाफ राजपूतों, अहोम, मराठों, सिखों और जाटों के संघर्ष का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें गुरु अर्जन देव और गुरु तेग बहादुर की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सिख गुरुओं के खिलाफ मुगलों की क्रूरता की मिसालें इतिहास में कम ही मिलती हैं। इसके अलावा, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा 1699 में खालसा पंथ की स्थापना और सिख मिसलों के उदय का भी उल्लेख किया गया है।


जाट विद्रोह और मराठा स्वराज्य

पुस्तक में गंगा-यमुना दोआब के जाटों के मुगलों के खिलाफ प्रतिरोध को भी शामिल किया गया है। इसमें औरंगजेब की धार्मिक नीतियों और भारी करों के कारण 1669 में गोकुल जाट के नेतृत्व में हुए विद्रोह का उल्लेख किया गया है।


मंदिरों का सामाजिक-आर्थिक योगदान

पाठ्यपुस्तक में मंदिरों को केवल धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि उनके आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक योगदान पर भी चर्चा की गई है। इसमें मंदिरों के भूमि स्वामित्व, रोजगार, दान और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है। साथ ही, 11वीं सदी के बाद कई मंदिरों की लूट और विध्वंस तथा बाद में उनके पुनर्निर्माण का भी विवरण दिया गया है।