कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान किताब में न्यायपालिका की चुनौतियों पर चर्चा
नए बदलावों की शुरुआत
नई दिल्ली: भारत की शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है। NCERT ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की एक नई पाठ्यपुस्तक जारी की है, जिसमें न्यायपालिका के मुद्दों पर गहराई से चर्चा की गई है। पहले के संस्करणों में केवल अदालतों की संरचना और कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया था, लेकिन अब छात्रों को न्याय प्रणाली की वास्तविक चुनौतियों से अवगत कराया जा रहा है। इस किताब में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि न्यायपालिका के विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार व्याप्त है, जो गरीबों के लिए न्याय प्राप्त करना और भी कठिन बना देता है। इसके अलावा, लंबित मामलों की बड़ी संख्या का भी उल्लेख किया गया है, जो पूरे न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाता है।
न्यायपालिका की चुनौतियों का सामना
नई पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भ्रष्टाचार को सबसे बड़ा मुद्दा बताया गया है, जो आम जनता के विश्वास को कमजोर करता है। विशेष रूप से, गरीब और कमजोर वर्ग के लिए न्याय तक पहुंचना कठिन हो जाता है। किताब में पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई के जुलाई 2025 के बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कदाचार से जनता का विश्वास टूटता है। इसे बहाल करने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।
लंबित मामलों का संकट
अदालतों में मामलों की संख्या अत्यधिक बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81,000 मामले लंबित हैं, जबकि हाईकोर्ट में यह संख्या करीब 62.4 लाख तक पहुंच गई है। जिला और निचली अदालतों में 4.7 करोड़ से अधिक मामले पेंडिंग हैं। कुल मिलाकर, देशभर में 5.3 करोड़ से अधिक मामले लंबित हैं। ये आंकड़े न्याय में देरी की गंभीरता को दर्शाते हैं, जो आम नागरिक के लिए एक बड़ा झटका है।
जजों की कमी और अन्य समस्याएं
किताब में जजों की कमी को भी एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। देश में जजों की संख्या अपर्याप्त है, जिससे कार्यभार बढ़ता है। कानूनी प्रक्रियाएं जटिल और लंबी होती हैं। अदालतों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, जैसे कि अच्छे कमरे और तकनीकी उपकरणों की अनुपलब्धता, भी एक समस्या है। इन सभी कारणों से हजारों मामले वर्षों तक अटके रहते हैं। किताब में इन मुद्दों को विस्तार से समझाया गया है ताकि छात्र न्याय प्रणाली की कमजोरियों को समझ सकें।
सुधार के उपाय
किताब में समस्याओं के समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं। जजों को आचार संहिता का पालन करना आवश्यक है, जो अदालत के भीतर और बाहर दोनों जगह लागू होती है। न्यायपालिका में अपनी गलतियों को सुधारने का तंत्र भी मौजूद है। यदि कोई शिकायत है, तो उसे CPGRAMS पोर्टल पर दर्ज किया जा सकता है। 2017 से 2021 के बीच इस पोर्टल पर 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं। किताब में महाभियोग जैसी गंभीर प्रक्रिया का भी उल्लेख है, जो गंभीर मामलों में जजों को हटाने का मार्ग प्रशस्त करती है।