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गाजियाबाद के DPSG स्कूल में अभिभावकों का विरोध: पढ़ाई का समय बढ़ाने पर नाराजगी

गाजियाबाद के दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPSG) के अभिभावक स्कूल प्रबंधन के निर्णय से नाराज हैं, जिसने पढ़ाई का समय दो घंटे बढ़ा दिया है। अभिभावकों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, जहां उन्होंने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यह निर्णय बच्चों पर अतिरिक्त बोझ डाल रहा है और नियमों का उल्लंघन कर रहा है। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे और बड़े आंदोलन की योजना बनाएंगे।
 

गाजियाबाद में अभिभावकों का विरोध


गाजियाबाद: गाजियाबाद के मेरठ रोड पर स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPSG) के अभिभावक हाल ही में स्कूल प्रबंधन के एक निर्णय से काफी असंतुष्ट हैं। स्कूल ने अचानक पढ़ाई के समय में दो घंटे की वृद्धि कर दी, जिससे अभिभावक भड़क उठे। शनिवार को स्कूल के बाहर प्रदर्शन करने के बाद, सोमवार को सैकड़ों अभिभावक जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और वहां जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि इस निर्णय से बच्चों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है और नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।


अभिभावकों का आक्रोश

सोमवार की सुबह, इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में माता-पिता डीएम ऑफिस पहुंचे। उन्होंने 'डीपीएसजी हाय-हाय' और 'डीएम साहब बाहर आओ' जैसे नारे लगाए। गुस्साए अभिभावक कार्यालय के मुख्य गेट पर बैठ गए और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। इस प्रदर्शन में महिलाओं और पुरुषों दोनों ने भाग लिया और यह दो घंटे तक चला।


स्कूल पर गंभीर आरोप

इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय कक्कड़ ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने सीबीएसई के दिशा-निर्देशों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव से पहले अभिभावकों की राय लेना आवश्यक होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। कक्कड़ ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य बच्चों पर बोझ कम करना है, जबकि स्कूल ने समय बढ़ाकर दबाव बढ़ा दिया है।


परिवहन व्यवस्था की कमी

अभिभावकों का आरोप है कि बसों की कमी के कारण पढ़ाई का समय बढ़ाया गया है, जिससे बच्चे अनावश्यक रूप से लंबे समय तक स्कूल में रह रहे हैं। जब कुछ अभिभावकों ने विरोध किया, तो स्कूल प्रबंधन ने यह तक कह दिया कि यदि समस्या है, तो वे अपने बच्चों का दाखिला कहीं और करा लें। आईपीए के मीडिया कॉर्डिनेटर विवेक त्यागी ने कहा कि इससे बच्चों में थकान और तनाव बढ़ेगा।


स्वास्थ्य और विकास पर प्रभाव

विनय कक्कड़ और अन्य अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की कि बढ़े हुए समय से बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होगा। लंबे समय तक स्कूल में रहने से खेलकूद और आराम का समय कम हो जाएगा। अभिभावकों ने सवाल उठाया कि जब स्कूल इतनी अधिक फीस लेता है, तो बेहतर सुविधाएं और बसें क्यों नहीं उपलब्ध कराता।


ज्ञापन सौंपा गया

अभिभावकों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि बिना अभिभावकों की सहमति के बढ़ाया गया समय तुरंत वापस लिया जाए। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग के सभी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और स्कूल प्रबंधन को जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आगे भी बड़ा आंदोलन करेंगे।