नादिरशाह का दिल्ली पर हमला: मुगल साम्राज्य का पतन
नादिरशाह का ऐतिहासिक हमला
नई दिल्ली: हालांकि आज का ईरान राजनीतिक उथल-पुथल और आंतरिक संकटों से जूझ रहा है, लेकिन इतिहास में एक समय ऐसा था जब इसके एक शासक ने हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली पर ऐसा आक्रमण किया, जिसने मुगल साम्राज्य की नींव को हिला दिया। यह आक्रमण मुगल साम्राज्य के पतन की शुरुआत का प्रतीक बना। यह शासक था ईरान का शक्तिशाली राजा नादिरशाह।
अठारहवीं सदी की शुरुआत में, हिंदुस्तान अपनी अपार धन-संपत्ति और समृद्धि के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध था। मुगल शासन के दौरान, दिल्ली को दुनिया के सबसे धनी शहरों में गिना जाता था, लेकिन औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य कमजोर होने लगा। आंतरिक कलह, कमजोर प्रशासन और विलासिता में डूबे शासकों ने सल्तनत को कमजोर कर दिया। इसी कमजोरी ने विदेशी आक्रमणकारियों को भारत की ओर आकर्षित किया।
नादिरशाह: एक शक्तिशाली शासक
कौन था नादिरशाह?
नादिरशाह उस समय ईरान का सबसे शक्तिशाली शासक था। उसे दिल्ली की समृद्धि और मुगल सत्ता की कमजोरी का पूरा ज्ञान था। 1738 में, उसने खैबर दर्रे को पार किया और तेजी से भारत की ओर बढ़ा। उस समय मुगल बादशाह मोहम्मद शाह सत्ता में थे, जिन्हें एक कमजोर और ऐशपरस्त शासक माना जाता था।
दिल्ली की ओर बढ़ते हुए
दिल्ली पहुंचने से पहले किससे हुआ सामना?
दिल्ली पहुंचने से पहले, नादिरशाह का सामना करनाल में मुगल सेना से हुआ। संख्या में अधिक होने के बावजूद, मुगल सेना नादिरशाह की रणनीति के सामने टिक नहीं पाई और बुरी तरह हार गई। इस हार के बाद, नादिरशाह ने मोहम्मद शाह को बंदी बना लिया और उसके साथ दिल्ली में प्रवेश किया।
दिल्ली में कत्लेआम का आदेश
दिल्ली में कब दिया गया खुले कत्लेआम का आदेश?
शुरुआत में स्थिति शांत रही, लेकिन जल्द ही अफवाह फैल गई कि नादिरशाह मारा गया है। इस अफवाह के बाद, भीड़ ने ईरानी सैनिकों पर हमला कर दिया। गुस्से में आकर, नादिरशाह ने 22 मार्च 1739 को दिल्ली में खुले कत्लेआम का आदेश दे दिया। चांदनी चौक, दरीबा और जामा मस्जिद के आसपास हजारों लोगों की हत्या कर दी गई।
नादिरशाह की मांग
कत्लेआम रोकने के बदले नादिरशाह ने क्या मांगा?
कत्लेआम रोकने के बदले, नादिरशाह ने दिल्ली की अपार दौलत लूट ली। उसने सोना, चांदी, हीरे-जवाहरात और मुगल साम्राज्य की शान तख्त ए ताऊस अपने साथ ले गया, जिसमें कोहिनूर हीरा भी शामिल था। इस एक हमले ने मुगल सल्तनत को आर्थिक और राजनीतिक रूप से तोड़ दिया और इतिहास की दिशा बदल दी।