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बिहार में मॉडल स्कूलों की स्थापना से शिक्षा में सुधार

बिहार सरकार ने हर प्रखंड में मॉडल स्कूल खोलने का निर्णय लिया है, जिससे छात्रों को मुफ्त में JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का अवसर मिलेगा। यह योजना ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो शिक्षा में समानता लाने का प्रयास करती है। स्कूलों में अनुभवी शिक्षक, आधुनिक सुविधाएँ और करियर काउंसलिंग जैसी सेवाएँ उपलब्ध होंगी। प्रवेश परीक्षा के माध्यम से छात्रों को दाखिला मिलेगा, जिससे सभी वर्गों को समान अवसर प्राप्त होगा।
 

बिहार सरकार का नया कदम

नई दिल्ली: JEE और NEET जैसी परीक्षाएं देश के लाखों छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनकी तैयारी के लिए महंगी कोचिंग और शहरों की दौड़-भाग आवश्यक हो जाती है। इस समस्या का समाधान करने के लिए बिहार सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब राज्य के हर प्रखंड में मॉडल स्कूल खोले जाएंगे, जहां छात्रों को न केवल स्कूली शिक्षा बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी मुफ्त में मिलेगी। यह योजना ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। शिक्षा विभाग की यह पहल 'सात निश्चय 3' के तहत आ रही है, जिसका उद्देश्य शिक्षा में समानता लाना है।


मॉडल स्कूलों की विशेषताएँ

इन मॉडल स्कूलों में अनुभवी शिक्षक और विशेषज्ञ शिक्षा देंगे। छात्रों को नियमित टेस्ट सीरीज, आधुनिक पुस्तकालय, डाउट क्लियरिंग सेशन और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। कक्षा 9 से ही JEE, NEET और ओलंपियाड जैसी परीक्षाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, ताकि बच्चे समय पर मजबूत आधार बना सकें।


स्कूलों की स्थापना की योजना

राज्य के 534 प्रखंडों में एक-एक मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे। ये स्कूल इसी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होंगे। शिक्षा विभाग ने सभी आवश्यक तैयारियाँ तेज़ी से पूरी कर ली हैं। इस सुविधा के गांव-गांव तक पहुँचने से छात्रों को शहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।


दाखिले की प्रक्रिया

दाखिले के लिए एक प्रवेश परीक्षा अनिवार्य होगी, जो 11 मार्च 2026 को आयोजित की जाएगी। राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद इस परीक्षा का संचालन करेगी। परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को मेरिट लिस्ट के आधार पर प्रवेश मिलेगा। आरक्षण नीति भी लागू रहेगी, जिससे सभी वर्गों को अवसर प्राप्त होगा।


योजना का महत्व

यह निर्णय बिहार के लाखों छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा। अब महंगी कोचिंग फीस और शहरों की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने के अपने सपनों को पूरा कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य शिक्षा में असमानता को समाप्त करना है, और यह कदम उसी दिशा में एक मजबूत प्रयास है।