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भाईचारे की मिसाल: जेईई एडवांस्ड में टॉप रैंक के बावजूद आईआईटी कानपुर का चयन

जेईई एडवांस्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले महरूफ अहमद खान ने अपने जुड़वा भाई के साथ रहने के लिए आईआईटी बॉम्बे की बजाय आईआईटी कानपुर का चयन किया। यह निर्णय न केवल उनके परिवार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आईआईटी कानपुर के लिए भी एक नई उपलब्धि है। जानें कैसे इस निर्णय ने शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है और कैसे यह भाईचारे की मिसाल पेश करता है।
 

महत्वपूर्ण निर्णय ने खींचा ध्यान


जेईई एडवांस्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले महरूफ अहमद खान ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। बेहतर रैंक के बावजूद, उन्होंने आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लेने के बजाय आईआईटी कानपुर को चुना, ताकि वह अपने जुड़वा भाई के साथ रह सकें।


भाई के साथ रहने का निर्णय

भुवनेश्वर के महरूफ अहमद खान ने जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया 32वीं रैंक प्राप्त की। इस शानदार रैंक के बाद, उनके पास देश के प्रमुख संस्थानों में दाखिला लेने का अवसर था। फिर भी, उन्होंने आईआईटी बॉम्बे की बजाय आईआईटी कानपुर को प्राथमिकता दी। इसका मुख्य कारण उनका जुड़वा भाई मसरूर अहमद खान है, जिसने 169वीं रैंक हासिल की। दोनों भाई अब आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में एक साथ पढ़ाई करेंगे।


आईआईटी कानपुर के लिए नई उपलब्धि

महरूफ का यह निर्णय आईआईटी कानपुर के लिए एक नई उपलब्धि का प्रतीक है। यह संस्थान के लिए सात वर्षों में पहली बार है जब किसी टॉप-100 रैंक वाले छात्र ने यहां दाखिला लिया है। इससे पहले, 2019 में 95वीं रैंक वाले छात्र ने आईआईटी कानपुर में प्रवेश लिया था। संस्थान लंबे समय से ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों को आकर्षित करने का प्रयास कर रहा था।


स्कॉलरशिप योजना का असफल प्रयास

आईआईटी कानपुर ने 2022 में 'ब्राइट माइंड्स स्कॉलरशिप' योजना शुरू की थी, जिसका उद्देश्य टॉप रैंक वाले छात्रों को संस्थान से जोड़ना था। इस योजना के तहत हर साल तीन लाख रुपये तक की सहायता दी जाती थी। हालांकि, पिछले चार वर्षों में इस योजना के माध्यम से कोई भी छात्र संस्थान में दाखिला नहीं ले सका। अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण इस योजना को बाद में बंद कर दिया गया।


संस्थान का गर्व

जोसा की पांचवें चरण की काउंसिलिंग के बाद, महरूफ और उनके भाई ने आईआईटी कानपुर में दाखिला प्रक्रिया पूरी कर ली। संस्थान के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स, प्रोफेसर प्रतीक सेन ने कहा कि टॉप-32 रैंक वाले छात्र का आईआईटी कानपुर का चयन पूरे संस्थान के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि दोनों भाइयों का दाखिला सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। महरूफ का यह निर्णय न केवल शैक्षणिक उपलब्धि है, बल्कि परिवार और रिश्तों को प्राथमिकता देने का प्रेरणादायक उदाहरण भी है।