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भारतीय महिलाओं की शिक्षा और करियर में प्रगति: एक नई दिशा

भारतीय महिलाएं आज शिक्षा और करियर के क्षेत्र में पुरुषों को पीछे छोड़ रही हैं, लेकिन घर लौटते ही पारंपरिक जिम्मेदारियों का बोझ उन पर आ जाता है। हालिया रिपोर्ट ने इस दोहरी जिंदगी की सच्चाई को उजागर किया है। शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात बढ़ा है, और प्रबंधकीय पदों पर उनकी संख्या में भी वृद्धि हुई है। हालांकि, घरेलू कार्यों का बोझ अभी भी उनके कंधों पर है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि समाज की सोच में बदलाव आ रहा है, लेकिन असली बदलाव तब होगा जब घर के कामों में भी समानता आएगी।
 

महिलाओं की शिक्षा और करियर में प्रगति


आधुनिक भारतीय महिलाएं शिक्षा, नौकरी और करियर के क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकल रही हैं, लेकिन घर लौटते ही पारंपरिक जिम्मेदारियों का बोझ फिर से उन पर आ जाता है। केंद्र सरकार की हालिया रिपोर्ट 'भारत में महिला और पुरुष 2025' ने इस दोहरी जिंदगी की सच्चाई को उजागर किया है।


रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय महिलाएं घरेलू कार्यों में प्रतिदिन औसतन 289 मिनट (लगभग 5 घंटे) बिताती हैं, जबकि पुरुष केवल 88 मिनट (डेढ़ घंटे से भी कम)। इसका मतलब है कि महिलाएं घरेलू कामों में पुरुषों से तीन गुना अधिक समय लगाती हैं। भले ही वे ऑफिस में प्रबंधक बन जाएं, घर की जिम्मेदारियां, बच्चों की देखभाल और खाना बनाना मुख्य रूप से उनके ही कंधों पर होता है.


शिक्षा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

रिपोर्ट में शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति की अच्छी खबर है। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात (GER) 30.2 तक पहुंच गया है, जो पुरुषों के 28.9 से अधिक है। स्कूलों में भी लड़कों और लड़कियों की संख्या लगभग समान हो गई है। बेटियां अब डिग्री प्राप्त करने में लड़कों से आगे हैं।


करियर में महिलाओं की सफलता

महिलाओं ने प्रबंधकीय पदों पर भी शानदार प्रदर्शन किया है। इन पदों पर कार्यरत महिलाओं की संख्या में 102.54 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसका मतलब है कि महिलाएं अब केवल नौकरी नहीं कर रही हैं, बल्कि उच्च स्तर पर निर्णय लेने में भी सक्रिय हैं।


लिंग अनुपात में सुधार

समाज की सोच में बदलाव का संकेत लिंग अनुपात में भी देखने को मिलता है। जन्म के समय लिंग अनुपात 2017-19 में 904 से बढ़कर 2021-23 में 917 हो गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी महिलाओं की स्थिति में सुधार हुआ है।


दोहरी जिंदगी की वास्तविकता

रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि महिलाएं कार्यस्थल पर पुरुषों के बराबर या उनसे आगे हैं, लेकिन घर के भीतर असमानता अभी भी बनी हुई है। सुबह ऑफिस की तैयारी, दिनभर काम और शाम को घर का काम संभालना कई महिलाओं की दैनिक दिनचर्या है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ने के बावजूद घरेलू कार्यों का बोझ कम नहीं हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुरुषों को भी घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी करनी चाहिए।


आज की महिलाएं शिक्षित, सशक्त और महत्वाकांक्षी हैं। वे प्रबंधक बन रही हैं और अपने सपनों को पूरा कर रही हैं। लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब घरेलू कार्यों में भी समानता स्थापित हो। रिपोर्ट महिलाओं की प्रगति की सराहना करती है, साथ ही यह भी याद दिलाती है कि अभी बहुत कुछ करना बाकी है। देश की बेटियां आगे बढ़ रही हैं, यह एक सकारात्मक संकेत है। अब समाज और परिवार को भी उनका समर्थन करना चाहिए।