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महेश ट्यूटोरियल्स ने 33 सेंटर बंद किए, छात्रों में हड़कंप

महेश ट्यूटोरियल्स ने महाराष्ट्र में अपने 33 सेंटर बंद कर दिए हैं, जिससे लगभग 2500 छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। नए शैक्षणिक सत्र के लिए एडमिशन हो चुके थे, और अब अभिभावक फीस की वापसी की मांग कर रहे हैं। आरिहंत एकेडमी ने छात्रों की मदद का आश्वासन दिया है, लेकिन सभी छात्रों को यह सुविधा मिलेगी या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की जा रही है।
 

महेश ट्यूटोरियल्स का अचानक निर्णय


मुंबई: प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान महेश ट्यूटोरियल्स ने महाराष्ट्र में अपने 33 केंद्रों को अचानक बंद करने का निर्णय लिया है। इस कदम से लगभग 2500 छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। यह ध्यान देने योग्य है कि नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए छात्रों के एडमिशन पहले ही हो चुके थे और फीस भी जमा की जा चुकी थी। इस खबर ने छात्रों और उनके अभिभावकों को गहरे सदमे में डाल दिया है।


केंद्रों का बंद होना

7 जुलाई को ब्रांच हेड्स की बैठक के बाद, 10 जुलाई से सभी 33 केंद्रों पर पढ़ाई बंद कर दी गई। शिक्षक और स्टाफ भी इस स्थिति में अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर कक्षाएं अचानक रुक गईं, जिससे छात्रों की तैयारी पर नकारात्मक असर पड़ा है।


दिवालियापन की प्रक्रिया

कंपनी पर पहले से चल रहा है दिवालियापन का केस


महेश ट्यूटोरियल्स की पैरेंट कंपनी, एमटी एजुकेयर, दिसंबर 2022 से दिवालियापन की प्रक्रिया में है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने इस मामले को स्वीकार किया था। कंपनी की हालिया ऑडिट रिपोर्ट में भारी नुकसान और लगभग 74.29 करोड़ रुपये के बकाए का उल्लेख किया गया है। प्रमोटर महेश शेट्टी के खिलाफ व्यक्तिगत दिवालियापन की कार्यवाही भी चल रही है।


फीस वापसी की मांग

अभिभावक अब फीस की वापसी की मांग कर रहे हैं। कई माता-पिता फीस ऑडिट कराने और बाकी समय की फीस को प्रो-राटा (आनुपातिक) आधार पर लौटाने की बात कर रहे हैं। छात्रों की पढ़ाई में रुकावट आने से उनके भविष्य पर खतरा मंडरा रहा है।


आरिहंत एकेडमी का सहयोग

आरिहंत एकेडमी ने दिया सहारा


इस कठिन समय में, आरिहंत एकेडमी ने छात्रों की सहायता का निर्णय लिया है। कंपनी ने 17 जुलाई को एक प्रेस रिलीज में बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) के कुछ ब्रांचों में महेश ट्यूटोरियल्स के योग्य छात्रों को बिना किसी अतिरिक्त फीस के एडमिशन दिया जाएगा। छात्रों को केवल अपने कोर्स की बाकी फीस जमा करनी होगी।


छात्रों और शिक्षकों की चिंता

छात्रों-शिक्षकों में चिंता


बंद हुए केंद्रों में पढ़ाई कर रहे छात्र अब नए कोचिंग सेंटर की तलाश कर रहे हैं। कुछ छात्रों ने कहा कि साल के बीच में सब कुछ बदलना बहुत कठिन है। शिक्षक भी अपनी नौकरी और वेतन को लेकर चिंतित हैं। एमटी एजुकेयर की आर्थिक समस्याएं लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन अचानक इतने केंद्रों का बंद होना अभिभावकों के लिए नाइंसाफी भरा लग रहा है। शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की जा रही है ताकि छात्रों का नुकसान कम से कम हो।