पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: M फैक्टर से SIR की ओर बढ़ता राजनीतिक परिदृश्य
चुनावों में M फैक्टर की भूमिका
जब भी देश में चुनाव होते हैं, कुछ सामाजिक पहलुओं की चर्चा सबसे अधिक होती है। इनमें से एक महत्वपूर्ण पहलू 'M' फैक्टर है, जिसे विभिन्न संदर्भों में समझा जाता है। राजनीतिक ध्रुवीकरण से बचने वाली पार्टियां इसे महिला फैक्टर मानती हैं, जबकि धार्मिक राजनीति करने वाली पार्टियां इसे 'मुस्लिम' फैक्टर कहती हैं। पश्चिम बंगाल की स्थिति में कई 'M' फैक्टर हैं, जिनका चुनावी प्रभाव स्पष्ट है, लेकिन इस बार चर्चा का केंद्र स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) है।
TMC का आरोप
राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मानना है कि SIR प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर अल्पसंख्यक, पिछड़े और दलितों के वोट काटे गए हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वोट डालने योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल में M फैक्टर की चर्चा
पश्चिम बंगाल में चार प्रमुख M फैक्टर हैं, जिन पर चर्चा होती है: मुस्लिम, मतुआ, मोदी और ममता। इस बार ये चारों फैक्टर SIR के प्रभाव में कहीं खो गए हैं।
- मुस्लिम: राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 27 प्रतिशत है, जो चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुस्लिम वोटरों का झुकाव आमतौर पर TMC की ओर रहा है।
- मतुआ: मतुआ समुदाय लगभग 55 सीटों पर प्रभावी है। बीजेपी की ओर झुकाव होने के बावजूद, TMC को इस वर्ग से उम्मीदें हैं।
- मोदी: बीजेपी पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन TMC के लिए असली चुनौती मोदी की लोकप्रियता है।
- ममता: ममता बनर्जी बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं। बीजेपी के दिग्गज नेताओं की पूरी टीम के बावजूद, ममता का प्रभाव बना हुआ है।
SIR प्रक्रिया का विवाद
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया विवादों में रही है। यह प्रक्रिया डुप्लिकेट, मृत, स्थानांतरित और अवैध वोटरों को हटाने के लिए शुरू की गई थी। नवंबर 2025 में शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत 90.66 लाख नाम हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनमें वे लोग शामिल हैं जो लंबे समय से अपने पते पर नहीं रह रहे थे या चुनावी क्षेत्र से पलायन कर चुके थे।
ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया
ममता बनर्जी और TMC के नेता सड़कों पर उतरे हैं क्योंकि जिन जिलों में सबसे अधिक वोट कटे हैं, वे TMC के कोर वोट बैंक माने जाते हैं। TMC का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम जानबूझकर हटाए गए हैं।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि केवल वैध आधार पर ही नाम हटाए गए हैं।
TMC और BJP के बीच टकराव
बीजेपी का कहना है कि चुनाव आयोग ने अवैध वोटरों को हटाकर चुनाव को साफ और निष्पक्ष बनाया है। वहीं, TMC का आरोप है कि चुनाव आयोग बीजेपी के इशारे पर काम कर रहा है। TMC का दावा है कि कई जगहों पर उतने वोट काटे गए हैं, जितना 2021 के विधानसभा चुनाव में जीत-हार का अंतर था।