पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए लौट रहे प्रवासी मजदूर
पश्चिम बंगाल में चुनाव की तैयारी
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव के दो चरण आयोजित किए जाएंगे। सभी राजनीतिक दल चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में रैलियों और रोड शो का आयोजन कर रहे हैं। इस बीच, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर, जो विभिन्न राज्यों में काम कर रहे थे, अपने गृह जिलों की ओर लौटने लगे हैं।
प्रवासी मजदूरों की वापसी
चुनाव आयोग द्वारा विवादास्पद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान, अधिक प्रवासी जनसंख्या वाले जिलों में मतदाताओं के नाम हटाने की दर बढ़ गई है। ये प्रवासी मजदूर नहीं चाहते कि उनका नाम वोटर लिस्ट से हटे, इसलिए वे बंगाल लौटकर मतदान करने की इच्छा रखते हैं।
बंगाल लौटने वाले मजदूरों की संख्या
एक रिपोर्ट के अनुसार, मार्च में हजारों प्रवासी मजदूर बंगाल लौट आए थे, जिनमें से कई ईद के बाद यहीं रुक गए। अब दिल्ली, तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से मजदूर वापस लौट रहे हैं। इनमें घरेलू कामकाजी, कूड़ा बीनने वाले और निर्माण कार्य में लगे लोग शामिल हैं।
प्रवासी मजदूरों की संख्या का अनुमान
राज्य सरकार के अनुसार, लगभग 36 लाख बंगाली प्रवासी राज्य के बाहर काम कर रहे हैं, जबकि अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार यह संख्या 50 लाख तक हो सकती है। हावड़ा सहित कई रेलवे स्टेशनों पर मजदूरों को बैग और पेंट की खाली बाल्टी लिए देखा जा सकता है।
मतदाता पहचान का महत्व
मुर्शिदाबाद के लालगोला के एक मजदूर ने बताया कि वह आठ महीने तमिलनाडु में काम करने के बाद वापस आया है। उसने कहा, 'इस बार वोट डालना बहुत जरूरी है। मैं चाहता हूं कि मेरा नाम वोटर लिस्ट में बना रहे। जब मैं बाहर काम करता हूं, तो आधार के अलावा मेरा वोटर कार्ड ही मेरी पहचान होती है।'
ट्रेन में लौटने की चुनौतियाँ
वह मजदूर अपने आठ साथियों के साथ 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग के लिए अपने गृह जिले लौट रहा था। बीरभूम जिले के सैंथिया के जसमीर शेख ने बताया कि वे आमतौर पर ईद पर घर आते हैं, लेकिन इस बार चुनाव के कारण नहीं आ सके। ट्रेन में भीड़ के कारण उन्हें जुर्माना भरकर घर लौटना पड़ा।