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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की राजनीतिक यात्रा: एक नई शुरुआत

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की राजनीतिक यात्रा ने कई मोड़ लिए हैं। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि पर बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए कई रणनीतियाँ अपनाई हैं। ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी चुनौतियाँ और चुनावी संघर्ष ने राज्य की राजनीति को प्रभावित किया है। जानिए कैसे बीजेपी ने अपनी ताकत बढ़ाई और ममता बनर्जी की सत्ता को चुनौती दी।
 

पश्चिम बंगाल: श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि

पश्चिम बंगाल, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मातृभूमि है, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी अपना आदर्श मानती है। उनके 'एक ध्वज, एक देश, एक संविधान' के सिद्धांत पर बीजेपी की राजनीति आधारित है। हालांकि, इस राज्य में बीजेपी कई वर्षों तक हाशिए पर रही। अब पार्टी ने मुखर्जी के सपने को साकार किया है, और उन्हें श्रद्धांजलि दी है।


बीजेपी की पश्चिम बंगाल पर नजर

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की स्थिति हमेशा कमजोर रही है, चाहे वह कांग्रेस हो, लेफ्ट या तृणमूल कांग्रेस। अब, 9 मई को बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी कर रही है। वामपंथियों का 34 साल का शासन अब समाप्त हो चुका है। 294 विधानसभा सीटों में से केवल 2 सीटें कांग्रेस के पास हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने 80 सीटें जीती हैं। बीजेपी के पास 206 विधायक हैं।


नरेंद्र मोदी का युग और बीजेपी की रणनीति

2013 में, नरेंद्र मोदी का नेतृत्व बीजेपी के लिए एक नया मोड़ साबित हुआ। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की। 2016 में, पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने अपनी पहली कोशिश की, लेकिन ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 211 सीटें जीतीं।


बीजेपी की हार से सीख

2016 की हार ने बीजेपी को सबक सिखाया। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार को चुनौती दी और बीजेपी को सांप्रदायिक बताया। 2021 में, बीजेपी ने 77 सीटें जीतीं, जबकि ममता ने 215 सीटें हासिल कीं।


तीसरी बार में बीजेपी की सफलता

बीजेपी ने तीसरी बार में 206 सीटें जीतीं, जबकि ममता बनर्जी केवल 80 सीटों पर सिमट गईं। कांग्रेस और लेफ्ट का प्रभाव भी समाप्त हो गया।


लोकसभा चुनावों का प्रभाव

पश्चिम बंगाल में 42 लोकसभा सीटें हैं। 2014 में बीजेपी के पास केवल 2 सीटें थीं, लेकिन 2019 में उन्होंने 18 सीटें जीतीं। 2024 में तृणमूल ने 29 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 12 सीटें मिलीं।


ममता बनर्जी की विदाई की कहानी

पश्चिम बंगाल के वकील अंजन दत्ता का कहना है कि ममता बनर्जी की सरकार में तुष्टीकरण और सांप्रदायिक झड़पें बढ़ीं। बीजेपी ने इस माहौल का फायदा उठाया।


बीजेपी की रणनीतियाँ

बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ माहौल बनाने में सफलता पाई। ममता बनर्जी ने कई मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन बीजेपी ने उन्हें चुनौती दी।


2026 में बीजेपी का सपना साकार

बीजेपी ने बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सत्ता हासिल की। अब उनका सपना पूरा हो गया है।