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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: विवादास्पद मतदाता सूची में अधिकारियों के नाम गायब

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में मतदान प्रक्रिया जारी है, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के कारण लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इसमें चुनाव कराने वाले अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जो चौंकाने वाला है। अजीजुल हक जैसे अनुभवी अधिकारियों का नाम भी गायब है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में इन अधिकारियों ने याचिका दायर की है, लेकिन ट्रिब्यूनल की धीमी गति से स्थिति और भी जटिल हो गई है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी।
 

पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 का आयोजन चल रहा है। पहले चरण की मतदान प्रक्रिया 23 अप्रैल को संपन्न हो चुकी है, जबकि दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी। इस बार चुनाव में कई मुद्दों के बीच सबसे प्रमुख मुद्दा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) बना हुआ है, जिसके चलते टीएमसी, बीजेपी और चुनाव आयोग के बीच विवाद गहरा गया है।


मतदाता सूची में कटौती

एसआईआर के तहत लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। इसमें उन अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं जो पश्चिम बंगाल चुनाव में कार्यरत हैं। यह चौंकाने वाला है कि चुनाव कराने वाले अधिकारियों के नाम ही वोटर लिस्ट से गायब हैं।


पीठासीन अधिकारियों की स्थिति

पीठासीन अधिकारी हुए वोट वंचित


एक अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, अजीजुल हक, जो लगभग 30 वर्षों से पश्चिम बंगाल में चुनावों में पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं, इस बार वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं। वह उन 65 चुनाव अधिकारियों में से एक हैं जो विभिन्न सरकारों के तहत चुनाव में कार्य कर चुके हैं।


सुप्रीम कोर्ट में याचिका

इन सभी 65 अधिकारियों ने अपने नाम हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि वे अपनी शिकायत SIR के लिए गठित ट्रिब्यूनल के पास प्रस्तुत करें और उसके निर्णय का इंतजार करें।


ट्रिब्यूनल की धीमी गति

ट्रिब्यूनल की कछुआ चाल


पहले चरण की वोटिंग से पहले, ट्रिब्यूनल ने 34 लाख लंबित आवेदनों में से केवल 650 को ही आगे बढ़ाया, जिसमें से महज 139 नाम वापस वोटर लिस्ट में जोड़े जा सके। अब ट्रिब्यूनल के पास वर्तमान चुनाव के लिए नाम जोड़ने के लिए केवल दो दिन बचे हैं।


अजीजुल हक की चिंता

'मैं वोट नहीं दे सकता '


अजीजुल हक ने कहा, 'यह बहुत बुरा है। मैं वोट नहीं दे सकता, लेकिन मुझे नादिया जिले के पलाशीपारा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव कराना है। यहाँ 29 अप्रैल को मतदान होना है।' वह नादिया जिले के कृष्णानगर कॉलेजिएट स्कूल में वरिष्ठ शिक्षक हैं।


चुनाव कराने की स्थिति

चुनाव करवा सकते हैं, मगर...


इन चुनाव अधिकारियों का मामला देख रहे वकील आदित्य समद्दर ने कहा कि यह स्थिति बेहद अजीब है। उन्होंने बताया कि इन सभी 65 अधिकारियों को उनकी सत्यापित चुनावी पहचान के आधार पर पोलिंग ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया गया है। वकील ने कहा, 'मेरे क्लाइंट वोट देने के लिए भरोसेमंद नहीं पाए गए, लेकिन चुनाव कराने के लिए उन्हें योग्य माना गया।'