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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: शराब बिक्री पर प्रतिबंध लागू

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए शराब की बिक्री पर प्रतिबंध पहले ही लागू कर दिया गया है। चुनाव आयोग ने इसे मतदान से पहले प्रभावी किया है, जबकि टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद है। जानें चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता और टीएमसी के आरोपों के बारे में।
 

चुनाव से पहले शराब बिक्री पर रोक

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर शराब की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध को पहले ही लागू कर दिया गया है। मतदान 23 अप्रैल को होने वाला है, जबकि पहले यह बैन चुनाव से दो दिन पहले लगने वाला था। चुनाव आयोग ने इसे पहले ही प्रभावी कर दिया है।


बंद की गई शराब की बिक्री

जहां 23 अप्रैल को मतदान होना है, वहां शराब की बिक्री पहले से ही रोक दी गई है। चुनाव आयोग ने बताया कि उसे शराब की बिक्री में असामान्य वृद्धि देखने को मिली है। आयोग के बयान में कहा गया है कि 'अप्रैल 2026 में शराब की दुकानों द्वारा पैकेट वाली शराब की बिक्री पिछले साल की तुलना में अचानक बहुत अधिक बढ़ गई है। इसके साथ ही, संवेदनशील दुकानों की संख्या भी असामान्य रूप से बढ़ी है।'


आंकड़ों का विश्लेषण

चुनाव आयोग ने शराब की बिक्री की निगरानी, बिक्री के आंकड़ों और अन्य स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर यह निर्णय लिया है। अप्रैल में शराब की बिक्री पिछले साल के इसी महीने की तुलना में अधिक रही है।


टीएमसी और बीजेपी के बीच मुकाबला

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और बीजेपी के बीच इस बार कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी। बीजेपी राज्य में सत्ता हासिल करने के लिए प्रयासरत है।


चुनाव आयोग की प्रतिबद्धता

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को कहा कि बंगाल में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार, स्थानीय निकायों या स्वायत्त संस्थाओं के किसी भी कर्मचारी को चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं होगी।


टीएमसी के आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने वोटर लिस्ट की विशेष समीक्षा को लेकर चुनाव आयोग से पहले ही टकराव किया है। पार्टी का आरोप है कि आयोग बीजेपी की मदद कर रहा है, लेकिन चुनाव आयोग ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।


अधिकारियों के तबादले

चुनाव की घोषणा के बाद आयोग ने राज्य में कई अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के तबादले भी किए हैं। इस कदम से राज्य सरकार और सत्तारूढ़ पार्टी नाराज हो गई है। चुनाव आयोग का कहना है कि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ये सभी कदम आवश्यक हैं।