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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: वोटर लिस्ट से नाम हटने से ममता बनर्जी की चुनौती बढ़ी

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच, चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं। इस कदम ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है, जहां टीएमसी और विपक्षी दल बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं। ममता बनर्जी की राह अब और भी कठिन हो गई है, खासकर उन सीटों पर जहां अल्पसंख्यक आबादी अधिक है। जानिए इस प्रक्रिया का चुनावी परिणामों पर क्या असर पड़ सकता है और ममता के लिए क्या संभावनाएँ हैं।
 

पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तारीखें नजदीक आ रही हैं। इस बीच, चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत कई मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए हैं। लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम काटे जाने से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। टीएमसी और अन्य विपक्षी दल बीजेपी और चुनाव आयोग पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे उचित ठहरा रही है। इस प्रक्रिया के चलते टीएमसी को आगामी चुनावों में नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।


मतदाता सूची में कटौती का प्रभाव

पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से 11.9 प्रतिशत वोटरों के नाम हटाए गए हैं, जो इस प्रक्रिया की गंभीरता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट पर 51 हजार वोट कटने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। इस प्रकार, एसआईआर प्रक्रिया चुनावी मुद्दा बन गई है।


ममता बनर्जी की चुनौतियाँ

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर प्रक्रिया ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। वोटर लिस्ट में बदलाव से लगभग 50 सीटों पर उनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। राज्य की 49 सीटों पर 90 प्रतिशत से अधिक हिंदू आबादी है, जिनमें से 2021 में टीएमसी ने 29 और बीजेपी ने 20 सीटें जीती थीं। अब जिन सीटों से नाम हटाए गए हैं, वहां नए समीकरण बन रहे हैं, जो टीएमसी के खिलाफ जा सकते हैं।


कौन से जिलों में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए?

ममता बनर्जी के लिए चुनौतियाँ इसलिए बढ़ रही हैं क्योंकि जिन सीटों पर पहले अल्पसंख्यक आबादी के कारण उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही थी, वहां अब मुकाबला बढ़ गया है। मुर्शिदाबाद जिले में सबसे अधिक वोटर हटाए गए हैं, जहां 50 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम आबादी है। इस जिले में 22 सीटों में से केवल 2 पर बीजेपी को जीत मिली थी। इसके अलावा, उत्तर 24 परगना, मालदा, नदिया और दक्षिण 24 परगना में भी बड़ी संख्या में वोटर हटाए गए हैं।


क्या ममता को एसआईआर से लाभ हो सकता है?

हालांकि एसआईआर प्रक्रिया ममता बनर्जी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय उनके पक्ष में एकजुट होता दिख रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भारी संख्या में ममता बनर्जी को वोट देते हैं, तो उन्हें कुछ क्षेत्रों में लाभ मिल सकता है। हालांकि, इससे ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है, जो उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।