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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ईडी की बड़ी कार्रवाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने PDS घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। छापेमारी के दौरान 18.4 लाख रुपये नकद और कई संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस कार्रवाई ने राज्य के राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। डीसीपी शांतनु सिन्हा की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उन्हें जांच में शामिल होने के लिए समन भेजा गया था लेकिन वह अब तक पेश नहीं हुए हैं।
 

ईडी की छापेमारी से हड़कंप

पश्चिम बंगाल विधानसभा के दूसरे चरण की मतदान से ठीक दो दिन पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई की। कोलकाता स्थित ईडी कार्यालय ने 25-26 अप्रैल को PDS घोटाले से संबंधित मामले में निरंजन चंद्र साहा और अन्य के खिलाफ कोलकाता, हाबरा और बर्दवान में 11 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया।


तलाशी में क्या मिला?

इस छापेमारी के दौरान, ईडी ने 18.4 लाख रुपये नकद, कई संदिग्ध दस्तावेज और डिजिटल सबूत जब्त किए। इस कार्रवाई ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। बरामद की गई नकदी, सोने के आभूषण और दस्तावेज बड़े नेताओं और पुलिस अधिकारियों की ओर इशारा कर रहे हैं।


घोटालों का जाल

यह मामला मुख्य रूप से दो अलग-अलग घोटालों से संबंधित है। पहला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं। दूसरा राशन घोटाले से संबंधित है। ईडी को मिले सबूत भविष्य में कई सफेदपोशों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।


ईडी की छापेमारी में क्या हुआ?

  • 26 अप्रैल 2026 को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस के तहत तीन स्थानों पर छापे मारे।
  • यह कार्रवाई सोना पप्पू, जय एस. कामदार, डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास और अन्य के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है।
  • कल्याण शुक्ला और संजय कुमार कनोडिया के ठिकानों पर भी छापेमारी की गई।
  • इस दौरान 10 लाख रुपये नकद, सोने के गहने, डिजिटल उपकरण और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
  • बरामद दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि संदिग्धों और राजनीतिक रूप से जुड़े व्यक्तियों के बीच बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है।
  • जब्त किए गए दस्तावेजों से यह भी पता चलता है कि संदिग्ध व्यक्तियों और PEPs (राजनीतिक रूप से उजागर व्यक्ति) के बीच बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन हुआ है।
  • डीसीपी शांतनु सिन्हा बिस्वास को जांच में शामिल होने के लिए समन जारी किया गया है, लेकिन वह अब तक ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं।


डीसीपी की भूमिका पर सवाल

इस मामले में डीसीपी शांतनु सिन्हा की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। ईडी ने उन्हें पूछताछ के लिए समन भेजा था, लेकिन वह अब तक जांच एजेंसी के सामने नहीं आए हैं। ऐसे में एजेंसी उनके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है।