भीम राव आंबेडकर का चुनावी महत्व: पश्चिम बंगाल से केरल तक
भीम राव आंबेडकर: हर दल के लिए आदर्श
लोकसभा या राज्यसभा चुनावों में, चाहे भारतीय जनता पार्टी हो, तृणमूल कांग्रेस या द्रविड़ मुनेत्र कझगम, भीम राव आंबेडकर सभी के लिए आदर्श व्यक्तित्व बने हुए हैं। कांग्रेस के नेता भी उनकी पूजा करते हैं, वामपंथी नेता उन्हें सम्मान देते हैं, और राष्ट्रवादी भी उनकी सराहना करते हैं। आंबेडकर की जयंती और परिनिर्वाण दिवस पर, लोग उनके कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।
भीम राव आंबेडकर का जीवन
भीम राव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महो में हुआ, जिसे अब डॉ. आंबेडकर नगर कहा जाता है। वे बचपन से ही प्रतिभाशाली थे और सामाजिक क्रांति के प्रतीक बन गए। उन्हें दलित चेतना का आधुनिक शिल्पकार माना जाता है, और बड़ी संख्या में लोग उन्हें अपने प्रतीक के रूप में देखते हैं।
राजनीतिक दलों में आंबेडकर का प्रभाव
आंबेडकर पर राजनीति भी होती है। विभिन्न राजनीतिक दल उनके नाम का उपयोग कर सियासी लाभ उठाने की कोशिश करते हैं। उन्हें संविधान का शिल्पकार भी कहा जाता है, और वे संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष रहे। वर्तमान में, देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हो रहे हैं। आइए जानते हैं कि आंबेडकर इन चुनावों में क्यों महत्वपूर्ण हैं।
पश्चिम बंगाल में आंबेडकर का प्रभाव
पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं, जहां तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक संघर्ष चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी पर आंबेडकर का अपमान करने का आरोप लगाती है, जबकि बीजेपी भी इसी तरह के आरोप तृणमूल पर लगाती है। राज्य में लगभग 68 सीटें ऐसी हैं, जहां दलित मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
तमिलनाडु में आंबेडकर का महत्व
तमिलनाडु, द्रविड़ और दलित आंदोलनों का गढ़ रहा है। यहां दलित चेतना के कई विचारक हुए हैं। राज्य में लगभग 46 सीटें दलित बहुल हैं। आंबेडकर का नाम चुनावी रैलियों में प्रमुखता से लिया जाता है, और उनके सामाजिक समता के सिद्धांत को व्यापक स्वीकृति मिली है।
असम में आंबेडकर का प्रभाव
असम में दलित आबादी लगभग 7.15 प्रतिशत है। आंबेडकर को विचारधारा के रूप में ओबीसी वर्ग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां 8 सीटें अनुसूचित जाति-जनजाति के लिए आरक्षित हैं, और सभी दल उनके नाम का उपयोग कर रहे हैं।
केरल में आंबेडकर का महत्व
केरल में दलित आबादी 9.10 प्रतिशत है। यहां के राजनीतिक दल आंबेडकर को सम्मान देते हैं। राज्य में लगभग 14 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। वाम दलों ने दलितों के लिए कई आंदोलन किए हैं, और मुख्यमंत्री पिनराई विजयन आंबेडकर की जयंती पर जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए निर्देश दे रहे हैं।
पुडुचेरी में आंबेडकर का प्रभाव
पुडुचेरी में दलित आबादी 15.73 प्रतिशत है। यहां की 5 सीटें अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। चुनावी मौसम में सभी दल आंबेडकर को याद करते हैं, चाहे वह सत्तारूढ़ पार्टी हो या विपक्ष।