इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग की परीक्षा में गलत प्रश्नों पर उठाए सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट का कड़ा रुख
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षा में कई प्रश्नों की गलतियों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को निर्देश दिया कि वे न्यायालय में उपस्थित होकर शपथपत्र के माध्यम से यह स्पष्ट करें कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और 125 में से 35 प्रश्न (आयोग के अनुसार 33 प्रश्न) कैसे गलत पाए गए हैं।
गलत प्रश्नों का समाधान
अदालत ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में गलत प्रश्न होना गंभीर चिंता का विषय है और केवल गलत प्रश्नों के अंक अन्य प्रश्नों में वितरित करना स्थायी समाधान नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने यह आदेश रिट-ए संख्या 9799/2026, आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पारित किया।
आयोग की कार्यवाही पर असंतोष
सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि पहले सिलेबस से बाहर पाए गए 29 प्रश्नों के अलावा चार अन्य प्रश्न भी गलत पाए गए हैं। इस प्रकार कुल 125 प्रश्नों में से 33 प्रश्न त्रुटिपूर्ण पाए गए। आयोग ने इन प्रश्नों के अंक अन्य सही प्रश्नों में वितरित कर नई चयन सूची तैयार की है, जिसमें 42 नए अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस कार्यवाही पर असंतोष व्यक्त किया।
परीक्षा की गुणवत्ता पर सवाल
अदालत ने कहा कि जब किसी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जाते हैं, तब केवल अंक पुनर्वितरित करना पर्याप्त नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह मामला केवल परिणाम संशोधन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने और परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है।
सचिव और परीक्षा नियंत्रक को पेश होने का निर्देश
अदालत ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। उन्हें शपथपत्र दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि प्रश्नों का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता है, विशेषज्ञों का चयन कैसे होता है और भविष्य में ऐसी गंभीर त्रुटियों को रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे।
अगली सुनवाई की तिथि
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग का पूरा स्पष्टीकरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे अन्य संबंधित रिट याचिकाओं के साथ होगी।