चार धाम यात्रा 2026: पवित्र स्थलों की यात्रा का महत्व
चार धाम यात्रा का शुभारंभ
चार धाम यात्रा 2026: सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा चार धाम का आरंभ हो चुका है। हिमालय की गोद में बसी चार धाम की यात्रा का शुभारंभ हो गया है। यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खोले गए हैं। इसके बाद, श्री केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल को और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। चार धाम की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बद्रीनाथ धाम के दर्शन के बाद पांच प्राचीन मंदिरों के दर्शन करना भी महत्वपूर्ण है, जिन्हें पंच बद्री कहा जाता है। इस यात्रा से आत्मा की शुद्धि, पापों का नाश और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह वैष्णव परंपरा में एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल माना जाता है।
विशाल बद्री (श्री बद्रीनाथ): यह मुख्य मंदिर चमोली जिले में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है।
योग ध्यान बद्री: यह पांडुकेश्वर में है, जहाँ पांडवों ने अपना राज्य त्यागा था।
भविष्य बद्री: जोशीमठ के पास सुभाई में स्थित है, माना जाता है कि भविष्य में बद्रीनाथ यहीं स्थानांतरित होगा।
वृद्ध बद्री: अणिमठ में स्थित, जहाँ नारद मुनि ने तपस्या की थी।
आदि बद्री: कर्णप्रयाग के पास, जहाँ विष्णु जी ने सत्य, त्रेता और द्वापर युग में निवास किया था।
यह यात्रा उत्तराखंड में अलकनंदा घाटी के पवित्र स्थलों को जोड़ती है, जो भगवान विष्णु को समर्पित हैं। बद्रीनाथ के साथ इन चार पवित्र बद्री स्थानों के दर्शन के लिए आमतौर पर 7-8 दिनों की विशेष यात्रा की आवश्यकता होती है, जिसमें आदि बद्री, वृद्ध बद्री, योग ध्यान बद्री, बद्रीनाथ और भविष्य बद्री का क्रम शामिल होता है।