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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: चुनाव आयोग में विवाद और कार्रवाई

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच चुनाव आयोग में एक विवाद उत्पन्न हुआ है। एक वरिष्ठ पर्यवेक्षक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को चुनौती दी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पद से हटा दिया गया। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और चुनाव आयोग की सख्ती के बारे में। क्या यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी है? पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
 

चुनाव की तारीखें और विवाद

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को आयोजित होंगे, जबकि परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग इन चुनावों की तैयारियों में जुटा हुआ है, लेकिन इसके साथ ही कई विवाद भी सामने आए हैं। हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में एक वरिष्ठ पर्यवेक्षक ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को खुली चुनौती दी, जिससे बैठक का माहौल गरमा गया। इस घटना के तुरंत बाद, उस पर्यवेक्षक को उनके पद से हटा दिया गया।


ऑनलाइन बैठक में विवाद

चुनाव आयोग की एक ऑनलाइन बैठक के दौरान, कूच बिहार दक्षिण के पर्यवेक्षक अनुराग यादव ने ज्ञानेश कुमार की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने उन्हें घर जाने के लिए कहा, जिस पर यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने इस सेवा में 25 साल बिताए हैं और इस तरह का बर्ताव स्वीकार नहीं किया जा सकता।


बहस के बाद की स्थिति

अनुराग यादव, जो उत्तर प्रदेश सरकार में प्रमुख सचिव के पद पर हैं, और सीईसी के बीच तीखी बहस हुई। इस बहस के बाद कुछ समय के लिए बैठक में सन्नाटा छा गया, लेकिन फिर अन्य मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। बैठक के तुरंत बाद, चुनाव आयुक्त ने यादव को सामान्य पर्यवेक्षक के पद से हटा दिया। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें सीईसी के विरोध के कारण नहीं, बल्कि पेशेवर अक्षमता के चलते हटाया गया।


पद से हटाने का कारण

बैठक के दौरान, अनुराग यादव से मतदान केंद्रों की संख्या के बारे में सवाल पूछा गया, जिसका वह सही उत्तर नहीं दे सके। इस पर सीईसी ने उनकी आलोचना की, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि एक पर्यवेक्षक को ग्राउंड पर कई दिन बिताने के बाद भी ऐसी जानकारी नहीं देनी चाहिए, क्योंकि इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।


चुनाव आयोग की सख्ती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव ड्यूटी में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बंगाल के संवेदनशील जिलों पर आयोग की विशेष नजर है। अनुराग यादव पर की गई कार्रवाई को अन्य अधिकारियों के लिए चेतावनी माना जा रहा है, और उनके हटने के बाद नए अधिकारी की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।