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भारत ने ईरान से युआन में खरीदा कच्चा तेल, अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच नया कदम

भारत ने ईरान से कच्चा तेल खरीदने के लिए युआन में भुगतान किया है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने लगभग सात साल बाद यह सौदा किया है, जिसमें 20 लाख बैरल कच्चा तेल शामिल है। इस प्रक्रिया में आईसीआईसीआई बैंक की शंघाई शाखा का उपयोग किया गया है। हालांकि, अमेरिका द्वारा दी गई छूट समाप्त होने के बाद ईरान से तेल खरीदना फिर से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
 

भारत और ईरान के बीच तेल व्यापार में नया मोड़

नई दिल्ली। भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल के व्यापार में एक महत्वपूर्ण घटना घटी है। भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान से कच्चा तेल खरीदा है, लेकिन इस बार भुगतान डॉलर में नहीं, बल्कि चीनी मुद्रा युआन में किया गया है।

इकॉनमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम भारत ने अमेरिका की पाबंदियों के बीच अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उठाया है।

सूत्रों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने ईरान से खरीदे गए कच्चे तेल के लिए भुगतान करने का एक नया तरीका अपनाया है। मुंबई स्थित आईसीआईसीआई बैंक के माध्यम से यह भुगतान युआन में किया गया है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर में लेन-देन करना कठिन हो गया है। इस समस्या का समाधान करने के लिए आईसीआईसीआई बैंक ने अपनी शंघाई शाखा का उपयोग किया और वहां से पैसे सीधे विक्रेता के युआन खातों में भेजे। यह पहली बार है जब ईरान के साथ इस तरह के बड़े सौदे में चीनी मुद्रा का उपयोग किया गया है।

7 साल बाद ईरान से तेल की खरीद

भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने लगभग सात साल के अंतराल के बाद ईरान से 20 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है। यह तेल 'जया' नामक एक बड़े टैंकर के माध्यम से भारत पहुंचा है, जिसकी कुल कीमत लगभग 200 मिलियन डॉलर है।

इस सौदे की एक विशेषता यह रही कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने तेल की कुल कीमत का 95% भुगतान तब किया, जब जहाज भारतीय समुद्री सीमा में प्रवेश कर गया। आमतौर पर सरकारी कंपनियां तेल मिलने के बाद भुगतान करती हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया में बदलाव किया गया। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी निजी कंपनियों को भी ईरानी तेल के जहाज लाने की अनुमति दी गई है।

अमेरिकी पाबंदियों के प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ

अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान के साथ तनाव के कारण तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। इसे नियंत्रित करने के लिए अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी थी, जो अब समाप्त हो रही है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने स्पष्ट किया है कि यह छूट आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका मतलब है कि भविष्य में ईरान से तेल खरीदना फिर से चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। यही कारण है कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन अब आगे और तेल खरीदने की योजना नहीं बना रहा है। भारत के लिए यह कदम अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और महंगे तेल से बचने का एक प्रयास था।