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हुमायूं कबीर का ममता बनर्जी को रेजीनगर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ आया है जब हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को रेजीनगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया। कबीर, जो पहले टीएमसी से अलग हो गए थे, अब ममता को विधानसभा में वापस लाने का रास्ता दिखा रहे हैं। यह घटनाक्रम ममता के राजनीतिक संकट के बीच हुआ है, जिससे राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कबीर का यह प्रस्ताव ममता के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।
 

पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में गुरुवार को एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। 'आम जनता उन्नयन पार्टी' (AJUP) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने ममता बनर्जी को विधानसभा में लौटने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने ममता को मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट से चुनाव लड़ने का आमंत्रण दिया है, जिसे पहले उन्होंने अपने बेटे के लिए आरक्षित किया था। कबीर ने पार्टी की वर्तमान स्थिति के लिए अभिषेक को जिम्मेदार ठहराया। यह वही हुमायूं कबीर हैं जिन्होंने कुछ समय पहले टीएमसी से अलग होकर ममता सरकार को गिराने की कसम खाई थी। टीएमसी से अलग होने के बाद, कबीर ने अपनी पार्टी बनाई और रेजीनगर और नौदा दोनों सीटों पर जीत हासिल की।


ममता बनर्जी को रेजीनगर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव

ऋतब्रत और संदीपन का धोखा

कबीर ने कहा कि ऋतब्रत और संदीपन ने ममता बनर्जी को धोखा दिया है। उन्होंने ममता को संसदीय राजनीति में बने रहने की सलाह दी और रेजीनगर से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा। कबीर ने 2026 के विधानसभा चुनावों में मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों, नौदा और रेजीनगर से जीत हासिल की है। चुनाव नियमों के अनुसार, उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। कबीर ने कहा कि वे रेजीनगर सीट छोड़ने के लिए तैयार हैं, जिससे ममता बनर्जी वहां उपचुनाव में भाग ले सकें।


कबीर का ममता के प्रति सहानुभूति

कबीर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि ममता बनर्जी उनके पास आती हैं, तो वे उन्हें रेजीनगर से विधानसभा में भेज सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ममता नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो उनकी जीत की संभावना कम है। लेकिन रेजीनगर में कबीर खुद इस्तीफा देकर उनकी जीत सुनिश्चित करेंगे।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े संकट का सामना कर रही हैं। टीएमसी चुनाव हार चुकी है और पार्टी में बगावत हो चुकी है। वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट छोड़ दी है और भवानीपुर सीट अपने पास रखी है। शुभेंदु ने भवानीपुर में ममता बनर्जी को हराया था।


कबीर का बदलता रुख

हुमायूं कबीर को मुर्शिदाबाद का एक प्रमुख मुस्लिम नेता माना जाता है। पिछले साल पार्टी नेतृत्व के विवाद के बाद उन्हें टीएमसी से निकाल दिया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी बनाई और ममता सरकार के सबसे बड़े आलोचक बन गए। हालांकि, अब कबीर का रुख बदलता हुआ नजर आ रहा है। उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि उनकी वर्तमान स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है। कबीर ने कहा कि आज जो कुछ भी वे हैं, वह ममता बनर्जी की वजह से है।

यह एक बड़ी विडंबना है कि जो नेता पिछले एक साल से ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल करने में जुटा था, वही अब उन्हें विधानसभा में वापस लाने का रास्ता दिखा रहा है। ममता बनर्जी इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसने राज्य की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं।