CBFC के नए दिशा-निर्देश: फिल्म प्रमाणन में महत्वपूर्ण बदलाव
CBFC के नए दिशा-निर्देश
CBFC के नए दिशा-निर्देश: सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने 18 सितंबर 2026 को फिल्म प्रमाणन के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश 1991 के पुराने नियमों की जगह लेंगे। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन अब इन्हीं नए दिशा-निर्देशों के आधार पर फिल्मों को सर्टिफिकेट प्रदान करेगा।
फिल्मों में नशे पर चेतावनी अनिवार्य
नए दिशा-निर्देशों में सबसे बड़ा बदलाव नशीले पदार्थों से संबंधित दृश्यों पर है। यदि किसी फिल्म में नशीले पदार्थों का सेवन, उपयोग या तस्करी का दृश्य है, तो उस पर एक अनिवार्य वैधानिक चेतावनी लगानी होगी। चेतावनी का पाठ होगा - 'अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और जेल की सजा दिलाते हैं, नशे को ना कहें।' इससे फिल्म निर्माताओं को ड्रग्स के चित्रण में अधिक सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया गया है।
यूए कैटेगरी में बदलाव
अब उम्र के आधार पर यूए श्रेणी को आधिकारिक रूप से दिशा-निर्देशों में शामिल किया गया है। पहले केवल एक यूए सर्टिफिकेट होता था, लेकिन अब यूए 7+, यूए 13+ और यूए 16+ जैसी अलग-अलग श्रेणियां हैं। ये बदलाव 2025 में सिनेमैटोग्राफ एक्ट में संशोधन के परिणामस्वरूप हुए हैं, जिन्हें अब नए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। फिल्म को यू, यूए 7+, यूए 13+, यूए 16+, ए या एस सर्टिफिकेट मिल सकता है, जिससे माता-पिता को यह तय करने में मदद मिलेगी कि फिल्म उनके बच्चों के लिए उपयुक्त है या नहीं।
पुराने प्रतिबंधों में निरंतरता
हिंसा, अपराध, नशा और संवेदनशील विषयों पर पुराने प्रतिबंध लगभग वैसे ही रहेंगे। असामाजिक व्यवहार या हिंसा को ग्लैमराइज नहीं किया जा सकता। बच्चों से संबंधित दृश्य, जानवरों पर क्रूरता, दिव्यांग व्यक्तियों का अनुचित चित्रण, यौन हिंसा, सांप्रदायिक या राष्ट्रविरोधी भावनाएं, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी सावधानी बरतनी होगी। फिल्म का सर्टिफिकेशन उसके पूरे कंटेंट को देखकर ही तय किया जाएगा, न कि किसी एक दृश्य के आधार पर। संदर्भ, समय और वर्तमान सामाजिक मानदंडों को ध्यान में रखा जाएगा।
सीबीएफसी का उद्देश्य
सीबीएफसी का लक्ष्य सामाजिक जिम्मेदारी और कलात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना है। रचनात्मक स्वतंत्रता को अनावश्यक रूप से बाधित न करने का प्रयास किया जाएगा। इन नए दिशा-निर्देशों से फिल्म निर्माताओं को स्पष्ट दिशा मिलेगी और दर्शकों, विशेषकर बच्चों और युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।