Ram Kapoor ने Lock Upp में साझा किया पिता के अंतिम दिनों का दिल दहला देने वाला अनुभव
Lock Upp सीजन 2 में राम कपूर का भावनात्मक खुलासा
मुंबई: नेटफ्लिक्स पर प्रसारित हो रहा रियलिटी शो Lock Upp का दूसरा सीजन पहले दिन से ही चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में एक एपिसोड में अभिनेता राम कपूर ने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने दर्शकों को भावुक कर दिया। इस हफ्ते शो में प्रतियोगियों को एक-दूसरे के राज़ छुपाने का कार्य दिया गया था। इसी दौरान राम कपूर ने अपने पिता के अंतिम दिनों के बारे में एक गंभीर बात बताई, जिसने माहौल को गंभीर बना दिया।
राम कपूर का पिता का कैंसर से संघर्ष
राम कपूर ने बताया कि उनके पिता को 63 वर्ष की आयु में पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला था। प्रारंभ में डॉक्टरों ने सर्जरी की संभावना से इनकार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने कीमोथेरेपी के कई सत्र किए। इलाज का सकारात्मक असर हुआ और वह लगभग एक दशक तक सामान्य जीवन जीते रहे। लेकिन बाद में कैंसर वापस लौट आया और इस बार स्थिति अधिक गंभीर थी।
कोविड के दौरान पिता की इच्छा
राम ने बताया कि यह सब कोविड-19 महामारी के दौरान हुआ, जब उनके पिता सिंगापुर में थे। उस समय उनके पिता ने फोन पर अपनी इच्छा व्यक्त की कि वह अब इस बीमारी से और नहीं लड़ना चाहते। राम के अनुसार, उनके पिता ने उनसे पूछा कि क्या वह उनके अंतिम सफर में उनका साथ देंगे। यह सुनकर वह चौंक गए, लेकिन बाद में उन्होंने अपने पिता की भावनाओं को समझा।
अकेलेपन का डर
राम कपूर ने कहा कि जब उनके पिता आईसीयू में थे, तब वह उनके साथ थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता को मौत से नहीं, बल्कि अकेलेपन से डर था। उनकी एक ही इच्छा थी कि अंतिम समय में उनका बेटा उनका हाथ थामे रहे। राम ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से किया हुआ यह वादा निभाया और उनके अंतिम क्षणों में उनका साथ नहीं छोड़ा।
परिवार में तनाव
उन्होंने यह भी बताया कि उनके पिता चाहते थे कि उनके निधन के बाद कोई शोक न मनाए और उन्हें सम्मान के साथ विदाई दी जाए। इस निर्णय का उनके परिवार पर गहरा असर पड़ा। राम ने खुलासा किया कि इस फैसले के बाद उनकी मां और बहन पिछले पांच वर्षों से उनसे बात नहीं कर रही हैं। अंत में, राम ने कहा कि उन्हें इस फैसले का कोई पछतावा नहीं है। उनके अनुसार, उन्होंने एक बेटे के रूप में वही किया जो उनके पिता की अंतिम इच्छा थी। इस अनुभव ने उन्हें जीवन और मृत्यु को एक नए दृष्टिकोण से देखने की सीख दी है।