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असरानी का 82वां जन्मदिन: हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन की यात्रा

हिंदी सिनेमा के दिग्गज कॉमेडियन असरानी आज 82वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनका सफर संघर्षों से भरा रहा, लेकिन उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और अदाकारी से दर्शकों का दिल जीता। 'शोले' में जेलर का किरदार निभाकर उन्होंने अमरता हासिल की। इसके अलावा, वे एक प्रतिभाशाली गायक भी हैं। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और करियर की उपलब्धियाँ।
 

असरानी का जन्मदिन


मुंबई: प्रसिद्ध हिंदी फिल्म अभिनेता और हास्य कलाकार असरानी आज अपने 82वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1940 को जयपुर में हुआ था, और असली नाम गोवर्धन असरानी है। जब भी उनकी फिल्मों का जिक्र होता है, चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक सिनेमा में योगदान दिया और 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया।


फिल्मी सफर की चुनौतियाँ

असरानी का फिल्मी करियर आसान नहीं रहा। 1964 में, उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने अभिनय की बारीकियाँ सीखी। शुरुआत में उन्हें फिल्मों में ज्यादा अवसर नहीं मिले, और उन्हें एफटीआईआई में शिक्षक बनकर पढ़ाना पड़ा। लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं खोया और अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा।


कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का दिल जीता

1967 में रिलीज हुई फिल्म 'कांच की चूड़ियां' से असरानी ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा। धीरे-धीरे उन्हें छोटे-छोटे रोल मिलने लगे, जिनमें उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से सभी का ध्यान आकर्षित किया। उनकी सहज अदायगी और मासूमियत ने दर्शकों को उनसे जोड़ दिया।


शोले में जेलर का किरदार

असरानी ने भले ही सहायक भूमिकाएं निभाईं, लेकिन 'शोले' में जेलर का किरदार उन्हें अमर बना गया। उनका प्रसिद्ध डायलॉग 'हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं' आज भी लोगों की जुबान पर है। इस किरदार ने उन्हें हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाया।


असरानी का संगीत से जुड़ाव

असरानी केवल हास्य कलाकार नहीं हैं, बल्कि वे एक अच्छे गायक भी हैं। यह बात बहुत कम लोग जानते हैं। 1977 में आई फिल्म 'आलाप' में उन्होंने दो गाने गाए, जो उन्हीं पर फिल्माए गए। इसके अलावा, 'फूल खिले हैं गुलशन गुलशन' में उन्होंने प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार के साथ भी गाना गाया, जो उनके छुपे हुए टैलेंट को दर्शाता है।